त्रिपुरा उच्च न्यायालय ने राज्य और केंद्र सरकार को जनता को धोखा देने वाली गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) की संपत्ति बेचने और जमाकर्ताओं को पैसा लौटाने का निर्देश दिया है। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश टी अमरनाथ गौड़ की अध्यक्षता वाली एक खंडपीठ ने यह निर्देश दिया। न्यायाधीश गौड़ ने कहा कि एनबीएफसी की कंपनियों की संपत्तियां बेची जाएं और उससे प्राप्त पैसे को जमाकर्ताओं को लौटाया जाए। अदालत ने आदेश दिया, त्रिपुरा में एनबीएफसी की सभी संपत्तियों को संलग्न (एटैच) करें और कुर्क की गई संपत्तियों को मीडिया में व्यापक रूप से प्रचारित करके उसे नीलामी के लिए रखा जाए।

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न्यायालय ने कहा कि नीलामी निविदा के माध्यम से होगी। साथ ही व्यक्तिगत उपस्थिति तथा ई-नीलामी के माध्यम से भी होगी। नीलामी के लिए एक वैश्विक विज्ञापन होना चाहिए। न्यायालय ने अपने आदेश में कहा कि नीलामी से प्राप्त धन का हिसाब रखा जाना चाहिए और वितरकों को राशि के वितरण के लिए योजना तैयार की जानी चाहिए।

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न्यायालय ने राज्य और केंद्र सरकारों को डिफॉल्ट कंपनी के निदेशकों और भागीदारों के पासपोर्ट, पैन कार्ड, आधार कार्ड, क्रेडिट कार्ड और डेबिट कार्ड को ब्लॉक करने का भी निर्देश दिया। इस मामले में अगली सुनवाई 20 अप्रैल को होगी। इससे पहले आरोपियों को गिरफ्तार कर संबंधित अदालतों से रिमांड पर लिया जाना चाहिए। उल्लेखनीय है कि रोज वैली सहित 40 एनबीएफसी के खिलाफ जनता से ठगी के आरोप में त्रिपुरा के विभिन्न पुलिस थानों में 172 प्राथमिकी दर्ज हैं।