"महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे अपने गुट के विधायकों, सांसदों और उनके परिवारों के साथ शनिवार को गुवाहाटी पहुंचे। इस दौरे के साथ ही उनके खेमे की बगावत की चर्चा तेज हो गई है। विरोधी हमला करने का मौका नहीं छोड़ रहे हैं। ऐसा इसलिए कि उनके इस दौरे से उनके कैंप के 6 विधायकों ने खुद को अलग कर लिया। माना जा रहा है कि इनमें से कुछ मंत्री नहीं बनाए जाने से नाराज चल रहे हैं।

आपको बता दें कि यह दूसरी बार था जब शिंदे अपने 40 विधायकों और कुछ निर्दलीय एमएलए के साथ कामख्या मंदिर में दर्शन के लिए पहुंचे हैं। इससे पहले इसी साल जून में उद्धव ठाकरे के खिलाफ विद्रोह के बाद वे बागियों को लेकर गुवाहाटी में डेरा जमाए थे। शिंदे और उनके विधायक तीन दिनों तक गुजरात के सूरत में रहने के बाद यहां पहुंचे थे। वापसी में पहले सभी गोवा पहुंचे और फिर मुंबई का रुख किया था।

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एकनाथ शिंदे और उनके विधायकों ने जून में असम छोड़ने से पहले प्रसिद्ध कामाख्या देवी मंदिर में दर्शन किया था। हिमंत बिस्व सरमा से मिलने पहले शिंदे ने कहा, ''हमने कामाख्या देवी से महाराष्ट्र के लोगों के लिए अच्छे दिन मांगे हैं। महाराष्ट्र और असम का एक अलग संबंध है।'

मुख्यमंत्री और उनके समूह के विधायकों को असम की भाजपा सरकार ने राज्य अतिथि घोषित किया है। उन्हें विशेष प्रकार की सुरक्षा प्रदान की गई है। सरकार के तीन मंत्रियों का पारंपरिक तरीके से फूलम गमछा और एक जपी (असम की पारंपरिक शंक्वाकार टोपी) भेंट करके स्वागत किया गया। गुवाहाटी में मीडिया से बात करते हुए शिंदे ने कहा कि वह राज्य में अपने और अपने समूह के स्वागत से खुश हैं।

शिंदे की यात्रा को एकता के प्रदर्शन के तौर पर देखा जा रहा है। ऐसी अटकलें हैं कि शिंदे की बालासाहेबंची शिवसेना के कई विधायक पहले कैबिनेट विस्तार में शामिल नहीं किए जाने से परेशान हैं। तीन मंत्रियों सहति छह विधायक (तानाजी सावंत, गुलाबराव पाटिल, अब्दुल सत्तार, संजय गायकवाड़, चंद्रकांत पाटिल, महेंद्र दलवी) ने खुद को इस यात्रा से अलग रखा। शिंदे गुट के एक विधायक ने कहा कि व्यक्तिगत और पहले से तय कार्यक्रमों की वजह से ये विधायक हमारे साथ गुवाहाटी नहीं आए हैं।

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विपक्षी नेताओं ने शिंदे और उनकी पार्टी की आलोचना की है। शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने बुलढाणा में एक किसान रैली को संबोधित करते हुए कहा कि शिंदे और उनके समर्थकों के पास मौसमी बारिश से प्रभावित किसानों से मिलने का समय नहीं है। उन्होंने कहा, वे आशीर्वाद लेने गुवाहाटी गए हैं लेकिन मैं किसानों का आशीर्वाद लेने बुलढाणा आया हूं। उन्होंने कहा, 'अगर उनमें हिम्मत है तो इन देशद्रोही विधायकों और सांसदों को घोषणा करनी चाहिए कि वे भाजपा के टिकट पर चुनाव नहीं लड़ेंगे। वे शिवसेना और बालासाहेब का नाम और चेहरा चाहते हैं लेकिन आशीर्वाद के लिए वे मोदी की ओर देखते हैं।'

मंदिर यात्रा पर तंज कसते हुए विपक्ष के नेता अजीत पवार ने कहा, “कामाख्या देवी भैंसों की बलि मांगती हैं। अब वे किसकी बलि देने जा रहे हैं?” शिंदे ने विपक्षी नेताओं की आलोचनाओं का जवाब दिया और कहा, महाराष्ट्र के लोगों के लिए और राज्य से सभी संकटों को दूर करने के लिए गुवाहाटी आए हैं। देवी के आशीर्वाद से हमें सरकार मिली और अब हम फिर से यहां आ गए हैं। इस दौरे के बारे में बोलते समय विपक्ष को सावधान रहना चाहिए।''

दिलचस्प बात यह है कि भाजपा के दो नेता- खाद्य और नागरिक आपूर्ति मंत्री रवींद्र चव्हाण और मोहित भारतीय भी शिंदे और उनके समर्थकों के साथ गुवाहाटी गए थे। वे जून में भी विद्रोह के बाद गुवाहाटी में शिंदे और उनके विद्रोहियों के साथ थे। सत्तार से बीएसएस विधायक और राज्य के कृषि मंत्री ने पार्टी में किसी भी असंतोष से इनकार किया। उन्होंने कहा, कोई भी परेशान नहीं है। शिंदे और देवेंद्र फडणवीस सभी विधायकों के साथ समन्वय कर रहे हैं। मैं भी यात्रा का हिस्सा होता, लेकिन पूर्व प्रतिबद्धताओं के कारण इसमें शामिल नहीं हो सका।''