असम के वरिष्ठ पुलिस अधिकारी जीतमल डोले ने शुक्रवार को प्रतिबंधित उग्रवादी संगठन ULFA-I के कमांडर-इन-चीफ परेश बरुआ को असम का गद्दार बताया है। वर्तमान में असम के पूर्वी रेंज के उप महानिरीक्षक के रूप में कार्यरत, जीतमल डोले ने साक्षात्कार में कहा कि  ''परेश बरुआ आधुनिक असम के बदन बरफुकन हैं''।

19वीं शताब्दी में, बदन बरफुकन अहोम शासकों का एक सेनापति था, जिसने असम पर आक्रमण करने के लिए बर्मी को आमंत्रित करके राज्य को धोखा दिया था।
उसने उन रिपोर्टों का जवाब देते हुए बरुआ को देशद्रोही कहा, जिसमें दावा किया गया था कि आतंकवादी संगठन उसकी हत्या करने की योजना बना रहा है।


हाल ही में, कुछ रिपोर्टें सामने आई थीं जिनमें दावा किया गया था कि तिनसुकिया में कुछ मुठभेड़ों के बाद डोली उल्फा की हिट लिस्ट में हो सकता है। 2 जुलाई को काकोपोथार गांव में पहली मुठभेड़ में ज्ञान असोम नाम का एक कैडर मारा गया था. इसके तुरंत बाद 9 जुलाई को पेंगेरी गांव में प्रतिबंधित उग्रवादी संगठन आमने-सामने हो गया।

उन्होने कहा कि "जब से ULFA-I पर प्रतिबंध लगाया गया है, उन्होंने पुलिस और सेना के जवानों को निशाना बनाया और घात लगाकर हमला किया। जब भी ULFA-I को नुकसान होगा, वे जवाबी कार्रवाई करने की कोशिश करेंगे।" यह सोचकर कि ये मुठभेड़ डोले के निर्देश पर हुई हैं, उल्फा उसकी हत्या करने की योजना बना रहा है।


डोले बताया कि ''वे मुझे 1990 के दशक से निशाना बना रहे हैं, जब मैं गुवाहाटी और निचले असम में सेवा कर रहा था। इसलिए यह कोई नई बात नहीं है कि वे ULFA-I मुझे निशाना बना रहे हैं। उन्होंने आगे कहा कि उल्फा ने मुझे मारने के लिए कई बार अपने कैडर भेजे हैं, हालांकि उनके कैडर एक एनकाउंटर में मारे गए ''।


बाद में, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि ULFA-I के खिलाफ उनकी टिप्पणी उनकी निजी राय है और इसके लिए असम पुलिस को जिम्मेदार नहीं ठहराया जाना चाहिए।