असम में नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजन्स (NRC) अपडेटिंग अथॉरिटी ने असम पुलिस CID में NRC के पूर्व राज्य समन्वयक और IAS अधिकारी प्रतीक हजेला के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है, जिन्होंने सुप्रीम कोर्ट की देखरेख में विवादास्पद दस्तावेज के अद्यतन और प्रकाशन का नेतृत्व किया था।

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एनआरसी प्राधिकरण भारत के रजिस्टर जनरल के तहत काम करता है और असम कार्यालय ने सुप्रीम कोर्ट में एक हलफनामा दायर कर प्रकाशित एनआरसी के व्यापक और समयबद्ध पुन: सत्यापन की मांग करते हुए कहा है कि इसे तैयार करते समय "बड़ी अनियमितताएं" की गई हैं। राज्य में भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार भी पुन: सत्यापन चाहती है।

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हजेला ने 1951 के एनआरसी को अपडेट करने की प्रक्रिया 2015 में शुरू की गई थी। अंतिम सूची अगस्त 2019 में प्रकाशित हुई थी, जिसमें 3,11,21,004 लोगों के नाम और 19,06,657 लोगों के नाम छूट गए थे। एनआरसी राज्य में घुसे अवैध बांग्लादेशियों की पहचान के लिए बनाया गया था। एफआईआर में एनआरसी के वर्तमान राज्य समन्वयक हितेश देव सरमा ने कहा है, यह संदेह है कि एक त्रुटि मुक्त एनआरसी के लिए भारत के सर्वोच्च न्यायालय के जनादेश के बावजूद तत्कालीन राज्य समन्वयक एनआरसी प्रतीक हजेला ने जानबूझकर टाला।