त्रिपुरा में 16 फरवरी को होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए अभी तक किसी भी राजनीतिक दल ने उम्मीदवारों के नाम तय नहीं किये हैं। उम्मीदवारों को लेकर चल रहे विवाद को सुलझाने के लिए सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी और विपक्षी मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी तथा कांग्रेस के नेता सोमवार को यहां पहुंचे। वैसे विपक्षी माकपा और कांग्रेस के बीच सीटों के बंटवारे को लेकर अभी तक कई दौर की चर्चा अनिर्णायक रही है जबकि संसदीय बोर्ड की अंतिम मंजूरी के लिए उम्मीदवार का चयन करने के लिए अधिकांश सीटों पर कई दावेदारों के होने से भाजपा के वास्ते एक बड़ी बाधा बन गए हैं।

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भाजपा की सहयोगी इंडिजिनस पीपुल्स फ्रंट ऑफ त्रिपुरा (आईपीएफटी) चुनाव के लिए पहाड़ी में एक दुर्जेय ताकत टिपरा मोथा के साथ विलय करने के लिए एक समझौते पर पहुंच गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, माकपा महासचिव सीताराम येचुरी सोमवार को कांग्रेस के साथ सीटों के बंटवारे को अंतिम रूप देने के लिए यहां पहुंचे, क्योंकि दोनों पार्टियों में छह सीटों के आवंटन पर असहमति हो गई है। दरअसल दोनों पार्टियां इन सीटों पर अपनी-अपनी दावेदारी पेश कर रही हैं। अब तक, माकपा ने कांग्रेस के लिए एक आरक्षित आदिवासी सीट सहित 17 विधानसभा सीटों को साझा करने पर सहमति व्यक्त की है।

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इस बीच, भाजपा के प्रदेश प्रभारी डॉ. महेश शर्मा, पूर्वोत्तर समन्वयक डॉ. संबित पात्रा, पार्टी के वरिष्ठ नेता अभिषेक शर्मा और चर्चिल महाकुल आज सुबह यहां उम्मीदवारों के नाम तय करने पहुंचे। नेडा के अध्यक्ष व असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के साथ उक्त नेताओं ने रविवार को दिल्ली में इस मामले पर चर्चा की और इसके बाद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के साथ बैठक भी की। प्रत्याशियों के बढ़ते दबाव को देखते हुए भाजपा ने स्थानीय स्तर पर सर्वसम्मति से प्रत्याशियों के चयन के लिए एक तंत्र तैयार किया लेकिन कुछ जगहों पर समूहों में हाथापाई हो गई, इसलिए यह प्रक्रिया बीच में ही रोक दी गई।

पार्टी सूत्रों ने दावा किया कि भाजपा का केंद्रीय नेतृत्व उम्मीदवारी में कम से कम 30 प्रतिशत महिलाओं का प्रतिनिधित्व चाहता है तथा युवा और शिक्षित लोगों को प्राथमिकता देना चाहता है, जिससे अधिकांश मौजूदा विधायकों का चुनाव लड़ना अनिश्चित हो गया है। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष राजीव भट्टाचार्य ने चयन प्रक्रिया और चल रही कवायद के बारे में विस्तार से बताए बिना मीडिया से कहा, हम अपना काम कर रहे हैं और उम्मीदवार चयन में कोई समस्या नहीं है। भाजपा एक बहुत ही अनुशासित और कैडर आधारित पार्टी है, पार्टी का आलाकमान जो भी फैसला करेगा, हम उसके साथ मिलकर दूसरे कार्यकाल के लिए अधिक सीटों वाली सरकार बनाएंगे। इस बीच, कांग्रेस अध्यक्ष बिरजीत सिन्हा ने कहा, हमने अपने उम्मीदवार के नाम पर पहले ही फैसला कर लिया है, जिस पर नयी दिल्ली में केंद्रीय चुनाव समिति की बैठक में चर्चा की जाएगी। संभवत: 25 जनवरी को हम उम्मीदवारों के नामों की घोषणा करेंगे। उन्होंने दावा किया कि माकपा के साथ सीट बंटवारे पर बातचीत चल रही है। उन्होंने कहा, हम उन सीटों पर कोई उम्मीदवार नहीं खड़ा करेंगे जहां कांग्रेस को हार का सामना करना पड़ सकता है, लेकिन माकपा उम्मीदवारों के जीतने की संभावना अधिक है , इसलिए सीट बंटवारे पर बातचीत जल्द ही सुलझ जाएगी।