नागालैंड के ओटिंग में 4 दिसंबर को हुई हत्याओं में कथित रूप से शामिल भारतीय सेना के 21 पैरा स्पेशल फोर्स के जवानों पर किसी भी तरह का सिविल ट्रायल नहीं होगा। सेना विशेष बलों के जवानों की बचने कोशिश करेगी जो कथित तौर पर इस घटना में शामिल थे।

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रिपोर्ट में भारतीय सेना के पूर्वी कमान के एक सूत्र के हवाले से कहा गया है की सभी आरोपी भारतीय सेना के उच्च प्रशिक्षित कर्मी हैं जो एनएससीएन-केवाईए के कुछ शीर्ष नेतृत्व सहित आतंकवादियों के एक समूह को बेअसर करने के मिशन पर थे।

सूत्र ने आगे कहा कि एसआईटी द्वारा दायर आरोपपत्र में यह आरोप लगाने की कोशिश की गई है कि एसएफ के जवान "निर्दोष ग्रामीणों को मारने के इरादे से" घटना स्थल पर थे। सूत्र ने रिपोर्ट के हवाले से दावा किया, "यह सच्चाई से बहुत दूर है।

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सूत्र ने कहा, “यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि ओटिंग के निवासियों को ले जा रही वैन ठीक उसी समय मौके पर पहुंची जब आतंकवादी वहां पहुंचने वाले थे। आतंकवादी करीब थे और भ्रम की स्थिति में भाग गए। 

रिपोर्ट में आगे लेफ्टिनेंट जनरल रैंक के एक सेवानिवृत्त अधिकारी के हवाले से कहा गया है कि एक दीवानी अदालत को एसएफ कर्मियों पर मुकदमा चलाने की अनुमति देना उन्हें भेड़ियों के हवाले करना होगा।

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उन्होंने कहा, यह उन सैनिकों के मनोबल को प्रभावित करेगा जो आदेशों का पालन करने के लिए अनिच्छुक होंगे। 

इस बीच भारतीय सेना ने नागालैंड में ओटिंग हत्याओं में अपनी कोर्ट ऑफ इंक्वायरी (सीओआई) पूरी की जहां 21 पैरा-एसएफ के जवानों ने पिछले साल दिसंबर में 14 नागरिकों को मार गिराया था।