असम के सीएम हिमंत बिस्वा सरमा ने जोर देकर कहा कि मदरसा शब्द का अस्तित्व समाप्त हो जाना चाहिए और सभी स्कूलों में आधुनिक शिक्षा होनी चाहिए। सरमा ने कहा कि बच्चों को उनके मानवाधिकारों का उल्लंघन करके मदरसे में भर्ती कराया जाता है।

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मदरसा शिक्षा का विरोध करने पर जोर देते हुए सरमा ने कहा कि किसी भी धार्मिक संस्थान में प्रवेश उस उम्र में होना चाहिए जहां व्यक्ति अपने निर्णय खुद ले सकें। आरएसएस से जुड़े पांचजन्य और ऑर्गनाइजर की ओर से आयोजित एक मीडिया कॉन्क्लेव में सरमा ने कहा कि बच्चे मदरसे में जाने के लिए तैयार नहीं होंगे अगर उन्हें बताया जाए कि वे वहां पढ़ाई के बाद डॉक्टर या इंजीनियर नहीं बन पाएंगे। 

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सरमा ने अपनी टिप्पणी पर विस्तार से कहा कि मदरसों में शिक्षा प्रणाली ऐसी होनी चाहिए कि वे छात्रों को भविष्य में कुछ भी करने का विकल्प दे सकें। सरमा ने कहा कि हर बच्चा औपचारिक शिक्षा पाने का हकदार है। जब यह बताया गया कि मदरसों में जाने वाले छात्र प्रतिभाशाली हैं क्योंकि वे मौखिक रूप से कुरान को याद करते हैं, तो सरमा ने कहा अगर एक मदरसा जाने वाला बच्चा मेधावी है, तो यह उसकी हिंदू विरासत के कारण है, एक समय में सभी मुसलमान हिंदू थे।