गुवाहाटी: असम के प्रसिद्ध कामाख्या मंदिर में वार्षिक अंबुबाची मेला बुधवार को शुरू हुआ।  जिसमें भक्तों को दो साल के अंतराल के बाद भाग लेने की अनुमति दी गई। मां कामाख्या देवालय के मुख्य पुजारी या 'बोर डोलोई' कविनाथ सरमा ने कहा कि अनुष्ठान के एक हिस्से के रूप में बुधवार को 'प्रवृत्ति' के साथ मंदिर के दरवाजे प्रतीकात्मक रूप से चार दिनों के लिए बंद कर दिए गए थे।

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उन्होंने कहा कि निवृत्ति या कपाट का उद्घाटन 26 जून की सुबह होगा। राज्य में आई भीषण बाढ़ को देखते हुए इस बार त्योहार को हल्के-फुल्के अंदाज में मनाया जा रहा है। 

मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने ट्वीट किया, "आज से शुभ अंबुबाची मेला शुरू होने पर, मैं मां कामाख्या से प्रार्थना करता हूं कि वे सभी को अच्छे स्वास्थ्य, सुख और समृद्धि का आशीर्वाद दें, साथ ही हमें सभी बुराइयों को दूर करने में मदद करें।

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कामरूप मेट्रोपॉलिटन के उपायुक्त पल्लव गोपाल झा ने कहा कि यहां नीलाचल पहाड़ियों के ऊपर स्थित मंदिर में आने वाले भक्तों के लिए व्यापक व्यवस्था की गई है।  लेकिन किसी भी निजी वाहन या सार्वजनिक परिवहन की अनुमति नहीं दी जा रही है।

उन्होंने कहा कि वरिष्ठ नागरिकों और विशेष आवश्यकता वाले श्रद्धालुओं को जिला प्रशासन द्वारा उपलब्ध कराए गए वाहनों में पहाड़ों की चोटी पर ले जाया जा रहा है।

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अधिकारियों ने कहा कि पांडु पोर्ट कैंप, मालीगांव और फैंसी बाजार में ओल्ड जेल कॉम्प्लेक्स में पहाड़ियों के नीचे शौचालय की सुविधा के साथ प्रत्येक में लगभग 30,000 भक्तों के रहने की क्षमता वाले तीन टेंट आवास स्थापित किए गए हैं। उन्होंने बताया कि मंदिर तक जाने वाली सड़क के किनारे निर्धारित स्थानों पर पेयजल और भोजन का वितरण किया जा रहा है.

प्रजनन पंथ में विश्वास से जुड़ा अंबुबाची, मंदिर का सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक आयोजन है। यह राज्य के पर्यटन कैलेंडर का भी एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जिसमें आमतौर पर त्योहार के दौरान लगभग 25 लाख फुटफॉल दर्ज किए जाते हैं।

मंदिर के पट चार दिनों के लिए बंद कर दिए जाते हैं, इस मान्यता का प्रतीक है कि देवी कामाख्या का वार्षिक मासिक धर्म इसी समय होता है। यह पांचवें दिन फिर से खुलता है जब भक्त आशीर्वाद लेने के लिए मंदिर में आते हैं।

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पिछले दो वर्षों के दौरान कामाख्या मंदिर को महामारी के कारण जनता के लिए बंद कर दिया गया था और अंबुबाची अनुष्ठान केवल पुजारियों द्वारा किया गया था।

मंदिर को 2020 में 20 मार्च से 11 अक्टूबर तक जनता के लिए बंद कर दिया गया था और पिछले साल इसे 13 मई से 21 अगस्त तक बंद कर दिया गया था।