अगरतला। सुपारी उत्पादकों द्वारा त्रिपुरा-मिजोरम सीमा से सटे जम्पुई हिल क्षेत्र में अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू करने के बाद सोमवार से पूर्वी पहाड़ी में बड़ी संख्या में पर्यटकों के फंसने से सामान्य जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ। सुपारी उत्पादक असम सरकार की ओर से त्रिपुरा से सुपारी की खेप भेजने पर रोक लगाये जाने की खिलाफ यह आंदोलन कर रहे हैं। असम सरकार द्वारा सुपारी के पारगमन पर लगाए गए प्रतिबंध के बाद से इस फसल का बाजार बंद कर दिया गया, जिससे उत्तरी त्रिपुरा में लगभग सात हजार परिवारों के सुपारी उत्पादकों की आजीविका छिन्न-भिन्न हो गई है। 

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ऑल त्रिपुरा एरेका नट ग्रोअर्स यूनियन (एटीएजीयू) का आरोप है कि इसके बावजूद 'मूल स्थान प्रमाण पत्र' प्रामाणिकता को मान्य करता है। एटीएजीयू के सचिव रूबेन रंगलोंग ने मंगलवार को त्रिपुरा के मुख्यमंत्री डॉ माणिक साहा को एक पत्र लिखकर इस मामले को असम के अपने समकक्ष के साथ उठाने और इस मुद्दे के जटिल होने से पहले इसे हल करने के लिए हस्तक्षेप करने की मांग की। सुपारी उत्पादकों ने त्रिपुरा को असम के माध्यम से देश के बाकी हिस्सों से जोडऩे वाले राष्ट्रीय राजमार्ग को भी अवरुद्ध करने की धमकी दी है। 

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उन्होंने मुख्यमंत्री से असम के माध्यम से सुपारी की फसलों के पारगमन के लिए तत्काल और प्रभावी कदम उठाने की मांग की, क्योंकि पारगमन प्रतिबंध के कारण भारी मात्रा में काटी गई सुपारी को उत्तरी त्रिपुरा के विभिन्न स्थानों में डंप कर दिया गया है। रूबेन ने आशंका जताई कि जब तक विवाद का समाधान नहीं होता है, तब तक बड़ी संख्या में सुपारी उत्पादक अपनी आजीविका खो देंगे। सुपारी उत्पादकों की दुर्दशा उत्तरोत्तर विनाशकारी होती जा रही है क्योंकि उनमें से कई पहले से ही कर्ज के जाल में फंसे हुए हैं और अपने बच्चों का स्कूल या कॉलेजों से नामांकन वापस लेने वाले हैं, शादी सहित जीवन की अनेक जरूरतों को टाल रहे हैं, चिकित्सा सुविधाएं और अपने दैनिक भोजन का प्रबंध कर रहे हैं।