त्रिपुरा में सिपाहीजाला जिले के चरिलम बाजार में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) समर्थकों के बीच झड़प में मारे गये माकपा कार्यकर्ता शाहिद मिया का शव पुलिस द्वारा कथित रूप से ले जाने के बाद  फिर से तनाव उत्पन्न हो गया। 

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माकपा के प्रदेश सचिव जितेंद्र चौधरी के नेतृत्व में पार्टी समर्थक शहर के पुलिस मुख्यालय में एकत्रित हुए और शाहिद का अंतिम संस्कार इस्लामी रीति-रिवाजों से करने के लिए उसके शव को वापस करने की मांग करने लगे। पार्टी कार्यकर्ताओं ने पुलिस पर हत्यारों को बचाने और भाजपा कार्यकर्ताओं को सुरक्षा प्रदान करने का आरोप लगाते हुए वहां नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि पुलिस ने मृतक के परिवारों और रिश्तेदारों और माकपा कार्यकर्ताओं पर लाठीचार्ज किया, जो अगरतला सरकारी मेडिकल कॉलेज के मुर्दाघर में शव लेने के लिए इकट्ठा हुए थे। 

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माकपा कार्यकर्ताओं और पुलिस अधिकारियों के बीच तीखी नोकझोंक हुई , जिसके बाद प्रदर्शनकारी सड़क पर बैठ गए और यातायात जाम कर दिया। चौधरी ने आरोप लगाया कि पुलिस ने अवैध रूप से परिवार के सदस्यों से शव छीना है जो कि नागरिकों के मौलिक अधिकार का उल्लंघन है और मृतक के परिवार की धार्मिक भावना को भी आहत करता है क्योंकि पुलिस ने इस्लामी रीति-रिवाजों के अनुसार शव का सम्मान नहीं किया है। बुधवार को हुए झड़प में शाहिद मियां के अलावा पूर्व वित्त मंत्री और माकपा विधायक भानु लाल साहा सहित दोनों दलों के कम से कम 25 कार्यकर्ता भी घायल हुए हैं। पुलिस सूत्रों ने बताया कि घटना में शामिल होने के आरोप में अब तक दोनों पक्षों के चार लोगों को गिरफ्तार किया गया है और अन्य आरोपियों के खिलाफ तलाशी अभियान जारी है। उन्होंने कहा कि शव को पुलिस हिरासत में इसलिए रखा गया कि तनाव में कमी हो क्योंकि माकपा शव के साथ एक रैली निकालना चाहती थी। पुलिस ने शांति स्थापित करने के लिए यह कार्रवाई की है तथा किसी नियम और कानून का उल्लंघन नहीं हुआ है।