पूर्वोत्तर भारत में भौगोलिक दूरी कोरोना महामारी के समय वरदान साबित हो रही है। एक तरफ  तो देश के कई हिस्से में कोरोना का कहर लगातार जारी है, वहीं दूसरी तरफ पूर्वोत्तर राज्यों की स्थिति बहुत शांत है। असम में अब तक कोरोना के 29 मामले सामने आए हैं, और एक की मौत हुई है और चार लोग ठीक हो गए हैं। उसी तरह अरुणाचल प्रदेश, त्रिपुरा, मणिपुर, मिजोरम, नगालैंड और मेघालय में एक भी में भी एक-एक मामले सामने नहीं आए हैं।


यहां पर इतने कम कोरोना मरीजों को देखते हुए कुछ विशेषज्ञों ने कहा है कि पूर्वोत्तर शेष भारत दूर है और शेष भारत से इसका संबंध गले की तरह एक संकरे इलाके से जुड़ा हुआ है। शेष भारत और पूर्वोत्तर के बीच आना-जाना सिर्फ वायु मार्ग, रेल और सड़क परिवहन पर निर्भर है और खास बात ये है कि लॉकडाउन की वजह से बाहर से लोगों का आना पूरी तरह बंद हो गया। लॉकडाउन के दौरान रास्ते में चल रही गाड़ियों से जो लोग आए, उन्हें अपने-अपने घरों रहने की सलाह दी गई थी।

डॉ. हिमंत विश्व शर्मा ने बताया कि 9 अप्रैल को वैसे करीब 75 हजार लोग होम क्वरोंटिन से मुक्त हो गए हैं। जानकारी मिली है कि असम में कोरोना के 29 मामले में आए हैं, उनमें से 28 का संबंध निजामुद्दीन तबलीगी से है। बता दें कि लॉकडाउन के दौरान पूर्वोत्तर राज्यों के लोगों की तत्परता की वजह से ये मामले नहीं बढ़े। इसी के साथ सभी राज्यों ने अपनी सीमा सील कर दी और किसी भी बाहरी व्यक्ति के प्रवेश पर रोक लगा दी। इतना ही नहीं ग्रामीणों ने खुद तय किया कि गांव के अंदर आने के लिए डाक्टर का प्रमाणपत्र अनिवार्य है।