वीरता एवं अदम्य साहस का परिचय देने तथा अपने प्राण जोखिम में डालकर दूसरों की जान बचाने वाले 18 बच्चों को इस साल राष्ट्रीय वीरता पुरस्कार से सम्मानित किया जायेगा। राष्ट्रीय वीरता पुरस्कार-2017 के लिए 11 लड़कों एवं सात लड़कियों को चुना गया है। इनमें तीन बच्चों को मरणोपरांत पुरस्कार प्रदान किया जायेगा। पीएम मोदी इन बहादुर बच्चों को पुरस्कृत करेंगे।

इसके अलावा गणतंत्र दिवस की संध्या पर राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद बच्चों के सम्मान में एक रिसेप्शन देंगे। बच्चों को गणतंत्र दिवस की परेड में भी शामिल किया जाएगा। तो आइए जानते हैं राष्ट्रीय वीरता पुरस्कार से सम्मानित होने जा रहे इन बच्चों में से एक ललछंदमा की कहानी। बता दें कि ललछंदमा को मरणोपरांत यह पुरस्कार मिलेगा।


- मिजोरम के रहने वाले एफ. ललछंदमा की कहानी आपकी आखों में आंसू ला देगी। दरअसल 12वीं में पढऩे वाले इस युवा ने अपने दोस्त की जिंदगी बचाने के लिए अपने प्राणों का आहूति दे दी। हालांकि ललछंदमा अपनी कोशिश में कामयाब नहीं हो पाया और दोनों की दर्दनाक मौत हो गई। दरअसल सात मई 2017 को ललछंदमा अपने दोस्त के साथ तवांग नदी के पास गया था, जो कि शहर से काफी दूर थी। इस दौरान वापस लौटते वक्त ललछंदमा के दोस्त का पांव फिसला और वह नदी में गिर गया।

अपने दोस्त को बचाने के लिए 18 साल के ललछंदमा ने जरा भी देर नहीं की और उसने भी नदी में छलांग लगा दी, लेकिन नदी में डूब रहे उसके दोस्त ने ललछंदमा को गदर्न के पास से कस कर पकड़ा लिया, बस यही कदम उन दोनों की मौत का कारण बना। दरअसल, गर्दन के पास कसकर पकड़े जाने के लिए ललछंदमा के लिए सांस लेना और तैराना मुश्किल हो गया था, फिर भी वह कोशिश करता रहा, लेकिन वह ना तो खुद को और ना ही अपने दोस्त की जान को बचा पाया। इस तरह ललछंदमा ने अपने दोस्त को बचाने के लिए खुद के प्राणों की आहूति दे दी। जब दोनों की लाश मिली, उस ललछंदमा के दोस्त ने उसे गर्दन के पास से कस कर पकड़ा हुआ था। वहीं ललछंदमा के पिता का कहना है कि उन्हें बेटे को खोने का दुख नहीं। उनके बेटे ने वही किया जो परिवार ने उसे सिखाया था। अपने बच्चे को खोने के बावजूद उस पिता का सारे बच्चों के नाम यही संदेश है कि परिणामों की चिंता किए बिना अपना सर्वश्रेष्ठ देने की कोशिश करें।