बाड़मेर । पाकिस्तान की सरहद से सटे राजस्थान के रेगिस्तानी जिले बाड़मेर में तापमान बढ़ने के साथ-साथ पानी की समस्या विकराल होती जा रही है। सरहदी गांवों में ग्रामीण पानी की बूंद-बूंद के लिए तरस रहे हैं। पानी की विकट समस्या के कारण गांवों में पलायन की स्थिति बन गई है। गांवों में पारंपरिक पेयजल स्रोत सूख गए हैं। लगातार छठे साल पढ़े अकाल के कारण पारंपरिक कुएं, तालाब, बावड़ियों, बेरियों तथा टांकों का पानी सूख चुका है।

हालात यह है कि जिले के करीब 860 गांव पेयजल की किसी योजना से जुड़े नहीं हैं। इन सिंचित, असिंचित गांवों में प्रशासन द्वारा पानी के टैंकरों की व्यवस्था की गई है, मगर यह महज खानापूर्ति तक ही सीमित है। गांवों में टैंकर पहुंच ही नहीं पा रहे हैं। ऐसे में गांवों में लोगों ने पानी पर पहरेदारी शुरू कर दी है।

जिले के सीमावतती क्षेत्र चौहटन के विषम भौगोलिक परिस्थितियों में बसे गफनों के 13 गांवों में पेपजल की सबसे बड़ी समस्या है। इन 13 गांवों-रमजान की गफन, आरबी की गफन, तमाची की गफन, भोजारिया, भीलों का तला, मेघवालों का तला, रेगिस्तानी धोरों के बीच बसे हुए हैं। इन गांवों में पहुंचने के लिए कोई रास्ता तक नहीं है। ऐसे में ग्रामीण अपनी छोटी-छोटी पानी की बेरियों पर ताले लगा कर रखते हैं।

 तालों के साए में पानी रखना यहां की परंपरा और जरूरत है। इन गांवों के लोग पानी की एक-एक बूंद की कीमत और उपयोगिता जातते हैं। पानी के कारण गांवों में होने वाले झगड़ों के कारण ग्रामीण मजबूरी में पानी को सुरक्षित रखने के लिए ताले लगा कर रखते हैं ताकि पानी चोरी न हो जाए। मगर इस बार पानी की जानलेवा किल्लत ने ग्रामीणों को पानी की सुरक्षा के लिए पहरेदारी का सहारा लेने पर मजबूर कर दिया।

तमाची गांव के सलाया खान निवासी ने बताया कि टांकों पर ताले जड़ने के बाद भी पानी चोरी हो जाता है। पानी की समस्या इस कदर है कि ग्रामीण अपनी जान जोखिम में डाल कर पानी चोरी कर ले जाते हैं। चोरों का पता लगाने का प्रयास भी किया, मगर सफलता नहीं मिली, तो ग्रामीणों ने पंचायत बुलाकर निर्णय लिया कि परंपरागत रूप से बनी पानी की बेरियों पर बारी-बारी से पहरेदारी की जाए। 

इन गांवों में पानी की बेरिया बनी हैं। सभी बेरियों पर लोगों ने अपने - अपने ताले जड़ रखे हैं। रासबानी के जुम्मा खान के अनुसार पानी की भयंकर किल्लत है। लोगों का कहना है कि इस जल संकट को लेकर सरकार कभी भी गंभीर नहीं दिखाई देती है और न ही कुछ करती है।