कोरोना के नए स्ट्रेन को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है कि वो पुराने मरीजों पर भी अटैक करता है तथा इस पर एंटीबॉडी भी फेल हो जाती है। ऐसा माना जाता है कि एक बार कोरोना होने के बाद उस व्यक्ति के शरीर में जो एंटीबॉडी बनती हैं वो दूसरी बार संक्रमित होने से रोकती हैं। लेकिन क्या ये कोरोना के दूसरे स्ट्रेन में भी संभव हैं अब इसका जवाब मिल गया है।
वैज्ञानिकों ने रिसर्च में पाया है कि जो लोग एक बार कोरोना होने के बाद उससे उबर चुके हैं वो इसके दूसरे स्ट्रेन से संक्रमित हो सकते हैंण् इसके पीछे  वैज्ञानिकों ने तर्क दिया है कि वायरस से संक्रमित होने के बाद शरीर में जो एंटी बॉडी बनती हैं वो खून में 5-6 महीने तक सक्रिय रहती हैं। इस दौरान कोरोना वायरस के शरीर में प्रवेश करने पर एंटीबॉडी में मौजूद प्रोटीन उसे बांध देता है जिससे वो शरीर में फैल नहीं पाता है।

वैज्ञानिकों ने कहा कोरोना के नए स्ट्रेन में ऐसा नहीं होता है। कोरोना का नया स्ट्रेन शरीर में मौजूद एंटीबॉडी के प्रोटीन में मौजूद स्पाइक को न्यूट्रीलाइ करने के लिए प्रतिरोधी क्षमता विकसित कर लेता है जो एंटीबॉडी के प्रतिक्रिया देने की क्षमता को प्रभावित कर देता है। यही वजह है कि जो लोग कोरोना से एक बार ठीक हो चुके हैं उनके शरीर में एंटीबॉडी मौजूद रहते हुए भी वो वायरस के दूसरे स्ट्रेन से संक्रमित हो सकते हैं।

वैज्ञानिकों ने इसपर किए रिसर्च को लेकर बताया कि हमारे द्वारा किए गए परीक्षण में आधे लोगों के रक्त के नमूनों से पता चला कि शरीर में मौजूद एंटीबॉडी नए स्ट्रेन के खिलाफ प्रतिक्रिया देने की क्षमता खो देता है। इससे पता चलता है कि उन्हें अब दोबारा संक्रमित होने से नहीं बचाया जा सकता है। वहीं टेस्ट में शामिल बाकी बचे लोगों के खून में पाया गया कि एंटीबॉडी का स्तर कम हो गया था

वैज्ञानिकों ने चेतावनी जारी की है कि जो लोग पहले ही कोरोना से संक्रमित हो चुके हैं उन्हें दोबारा होने से बचने के लिए सार्वजनिक स्वास्थ्य उपायों का पालन करना चाहिए। मास्क पहनना चाहिए और हाथों को नियमित रूप से धोना चाहिए। इतना ही नहीं जहां रह रहे हैं वहां सैनिटाइज़िंग और साफ.सफाई का विशेष तौर पर ध्यान रखकर ही वो कोरोना के नए स्ट्रेन से बच सकते हैं।

यह दावा दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रीय संक्रामक रोग स्वास्थ्य संस्थान के वैज्ञानिकों ने किया है। यह संस्थान सूक्ष्म जीव विज्ञान, विषाणु विज्ञान, महामारी, विज्ञान, निगरानी और सार्वजनिक स्वास्थ्य अनुसंधान के क्षेत्र में काम करता है।