लखनऊ। उत्तर प्रदेश में योगी सरकार ने विभिन्न जिलों में 'फूड फारेस्ट' विकसित करने के अभिनव प्रयोग के जरिये हरियाली को बढ़ाकर पर्यावरण संरक्षण की पहल है। मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से दी गयी जानकारी के अनुसार सरकार ने इस प्रयोग को कारगर बनाने के लिये विभिन्न कृषि जलवायु क्षेत्रों (एग्रो क्लाइमेटिक जोन) के 15 जिलों को चिन्हित किया है। इन जिलों में स्थानीय किसानों के सहयोग से अगले छह महीने में फूड फारेस्ट विकसित किए जायेंगे। इसकी कार्ययोजना के मुताबिक चिन्हित जिलों में बिजनोर, अमरोहा और सहारनपुर आम की पट्टी के लिये और संभल, रामपुर एवं बदायूं अमरूद पट्टी के लिये हैं। 

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इसी तरह अन्य जिले भी किसी न किसी फलपट्टी में शामिल हैं। ये पार्क इकोफ्रेंडली होने के साथ खुद में कृषि विविधीकरण की भी मिसाल होंगे। फूड फारेस्ट में संबंधित जिले के कृषि जलवायु क्षेत्र (एग्रो क्लामेटिक जोन) के अनुसार पौधों का चयन किया जायेगा। प्राकृतिक तरीके से नाइट्रोजन फिक्सेशन के लिए फूड फारेस्ट में दलहनी फसलों को भी स्थान दिया जाएगा। मसलन गोरखपुर में विकसित किए जाने वाले फूड फारेस्ट में पहले चरण में आम, अमरूद, अनार और पपीते के पौध लगाये जाएंगे। दूसरे चक्र में जामुन, बेर यानी छोटे जंगली फलों के पौधे लगाए जाएंगे। 

तीसरे चक्र में अरहर, मूंग, उड़द, मटर व चने की बोआई होगी। चौथे चरण में लेमनग्रास, तुलसी, अश्वगंधा जैसे हर्बल प्लांट पार्क लगेंगे। पांचवें चक्र में गिलोय, अंगूर, दमबूटी आदि बेल प्रजाति रोपित होगी। इसी तरह पौधों का चयन अलग-कृषि जलवायु क्षेत्र के अनुसार होगा। इसमें लगी दलहनी फसलें प्राकृतिक रूप से नाइट्रोजन स्थिरीकरण (फिक्सेशन) का काम करेंगी। पक्षियों की बीट प्राकृतिक खाद का काम करेगी। फूलों पर आने वाली मधुमक्खियां और तितलियां परागण का काम करेंगी। 

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कार्ययोजना के मुताबिक सरकार का मकसद किसानों की आय बढ़ाना है। धान-गेंहू की परंपरागत खेती की बजाय कृषि विविधीकरण से ही ऐसा संभव है। ये पार्क खुद में इसकी नजीर होंगे। यही नहीं इन पार्कों से प्रसंस्करण इकाइयों के लिए भविष्य में कच्चा माल मिलेगा। फलदार पौधों का रकबा बढऩे के साथ हरियाली भी बढ़ेगी। इस योजना के शुरुआती चरण में बुलन्दशहर, सहारनपुर, मेरठ, गाजियाबाद, बिजनोर, अमरोहा, मुरादाबाद, संभल, रामपुर, बरेली, बदायूं, शाहजहांपुर, पीलीभीत, गोरखपुर और गौतमबुद्धनगर में 'फूड फॉरेस्ट' बनेंगे।