यूपी में अगले छह महीने तक कोई भी सरकारी कर्मचारी हड़ताल नहीं कर सकेगा. आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए राज्य सरकार ने छह महीने तक हड़ताल करने पर रोक लगा दी है. सभी सरकारी विभागों और संस्थाओं के कर्मचारियों पर यह नियम लागू होगा. पूरी तरह सरकारी के साथ ही सरकारी सहायता प्राप्त संस्थाओं के कर्मचारी भी हड़ताल नहीं कर सकेंगे. इस मामले में अपर मुख्य सचिव डॉ. देवेश त्रिवेदी ने आदेश जारी किए हैं.

बता दें कि दो दिन पहले यूपी में बैंक कर्मचारियों ने हड़ताल की थी. यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियन्स ने केंद्र सरकार पर सरकारी बैंकों के निजीकरण की कोशिश का आरोप लगाते हुए हड़ताल बुलाई थी. गुरुवार को इस राष्ट्रव्यापी हड़ताल का पहला दिन था. हड़ताल के पहले दिन ही राज्य में करीब 20 हजार करोड़ रुपये का लेनदेन प्रभावित हुआ था. इस हड़ताल में लखनऊ जिले के 905 ब्रांच के करीब 10 हजार कर्मचारियों के साथ ही यूपी की 14 हजार ब्रांच के 2 लाख बैंककर्मी हड़ताल में शामिल हुए.

17 दिसंबर को लखनऊ के केजीएमयू में भी कर्मचारियों ने हड़ताल का आह्वान किया था. हड़ताल की खबर से ही KGMU प्रशासन में खलबली मच गई. इलाज के लिए अस्पताल आने वाले लोगों को भी काफी परेशानी उठानी पड़ी. हालांकि शिक्षा मंत्री सुरेश खन्ना के आश्वासन के बाद कर्मचारियों ने कुछ ही घंटों में हड़ताल को वापस ले लिया था. इस तरह से हड़ताल को देखते हुए यूपी सरकार ने अगले छह महीनों तक सरकारी कर्मचारियों की हड़ताल करने पर रोक लगा दी है.

यूपी विधानसभा चुनाव को देखते हुए योगी सरकार ने बड़ा कदम उठाया है. अब कोई भी सरकारी कर्मचारी अगले छह महीने तक हड़ताल नहीं सर सकेगा. यह आदेश अपर मुख्य सचिव ने जारी किया है. लगातार सरकारी कर्मचारियों की हड़ताल को देखते हुए यूपी सरकार ने यह कदम उठाया है. कभी बैंककर्मी तो कभी डॉक्टर्स और अस्पताल के दूसरे कर्मचारी हड़ताल पर चले जाते हैं, जिसकी वजह से जनता को काफी परेशानी उठानी पड़ती है. यूपी में विधानसभा चुनाव नजदीक हैं. ऐसे हालात में कर्मचारियों की हड़ताल का असर सरकार पर भी पड़ेगा. वहीं चुनाव भी प्रभावित हो सकते हैं. यही वजह है कि सरकार ने 6 महीने तक सरकारी कर्मचारियों की हड़ताल पर रोक लगा दी है.