बीएचयू के सामाजिक विज्ञान संकाय में योग और अध्यात्म का मनोविज्ञान पाठ्यक्रम पढ़ाने की तैयारी की जा रही है। इस पाठ्यक्रम का आधार 105 वर्ष पुरानी पुस्तक ‘सनातन धर्म’ बनेगी।

संस्कृत के उद्धरणों के साथ अंग्रेजी में इस पुस्तक का प्रकाशन वर्ष-1916 में तत्कालीन सेंट्रल हिंदू कॉलेज के बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज की ओर से हुआ था। इस पुस्तक का कोई एक लेखक नहीं है। इसके सृजन में महामना पं. मदनमोहन मालवीय और एनी बेसेंट सरीखी हस्तियों का सम्मिलित योगदान है। इस पुस्तक के तीन खंड हैं। हिदू धर्म के मूल विचार, मान्यता एवं रीतिरिवाज, हिंदू धर्म और नैतिकता नामक तीन खंडों के 24 अध्यायों में सनातन धर्म की मूल शक्ति योग और अध्यात्म की मूल अवधारणा का वर्णन है।

सामाजिक विज्ञान संकाय के डीन प्रो. कौशल किशोर मिश्र ने बताया कि अध्यात्म का अभिप्राय किसी धर्म, संप्रदाय अथवा पंथ विशेष से नहीं है। उन्होंने बताया कि संकाय स्तर पर पाठ्यक्रम निर्धारण के लिए कमेटी गठन की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है।

पांच दशकों से भी अधिक समय से आउट ऑफ प्रिंट ‘सनातन धर्म’ पुस्तक की एक प्रति कुछ माह पूर्व अमेरिका के कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय के पुस्तकालय में पाई गई। इस पुस्तक का ई-संस्करण माइक्रोसॉफ्ट ने नेट पर अपलोड किया तो इस थाती की जानकारी हुई।