धन लक्ष्मी और वैभव प्रदान करने वाली भगवान नारायण की पत्नी महालक्ष्मी का त्यौहार दीपावली 14 नवंबर को आने वाला है,यदि विधिवत रूप से सीमित संसाधनों मे भी हम महालक्ष्मी पूजन करे तो निश्चित रूप हमारे जीवन से आर्थिक दरिद्रता का नाश होगा और लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होगी. 

- दीपावली मे अमावस का महत्व*- सनातन धर्म मे सभी पूजन पाठ तिथि के अनुसार किये जाते है,रक्षा बंधन पूर्णिमा तिथि को मनाया जाता है,भगवान गणेश चतुर्थी तिथि को विराजते है, तथा इसी तिथि को उनका पूजन होता है, नाग देव की तिथि पंचमी होती है, भगवान विष्णु को एकादशी तिथि मे ही पूजा जाता है. 

- अमावस पितरो की तिथि*-सनातन धर्म मे अमावस को शुभ तिथि नही माना जाता, इस दिन मजदूर वर्ग काम नही करता, यह तिथि पितरो के अधिकार मे है, इस तिथि को पितरो का तर्पण और पिण्ड दिया जाता है पितरो की कृपा से ही धन की प्राप्ति होती है यदि हम पितरो को तृप्त करते है तो हमे धन की प्राप्ति होती है. 

- दीपावली तिथि बड़ी अमावस*- दीपावली की रात्रि को काल रात्रि तथा इस अमावस्या को महा अमावस्या कहते है, इस दिन सूर्य जो की  जगत की सभी आत्माओ के स्त्रोत और  पितरो और प्रकाश  के अधिपति है अपनी नीच राशि मे रहते है,इस दिन चंद्र देव जो भगवान सूर्य के प्रकाश से प्रकाशित रहते है वे भी अस्त रहते साथ ही सूर्य और चंद्रमा राहु के नकसत्र स्वाति मे रहते है,जो की इन दोनो ग्रहो को अस्त कर अंधकार फैलाते है, यानी इस दिन परम अंधकार रहता है, इसलिए इसे महानिशा भी कहा जाता है, इस दिन महालक्ष्मी के पूजन से पितरो को परम तृप्ति मिलती है तथा धन धान्य और वैभव की वृद्धि होती है. 

- स्थिर लग्न और मध्य रात्रि मे श्रेष्ठ फलदायी है पूजन*- लक्ष्मी परम चंचला है, यह कही स्थिर नही होती, अंधकार मे ही  लक्ष्मी का निवास होता है,स्थिर लग्न चार है ,वृषभ,सिंह,व्रिस्चिक् और  कुंभ, दीपावली की रात्रि मे घोर अंधकार मे स्थिर लग्न मे महालक्ष्मी पूजन श्रेष्ठ फलदायी है,इन चार लग्नो मे से वृषभ और सिंह लग्न ही दीपावली की रात्रि मे उपलब्ध रहते है,जिसमे वृषभ लग्न शाम के आसपास और यदा कदा रात्रि 8 बजे के आसपास खत्म हो जाता है जिसमे अधिकतर लोग पूजा ही नही करते, दूसरा सिंह लग्न मध्य रात्रि मे 12 बजे से 4 बजे के बीच आता है,इसमे भी लोग पूजा नही करते अधिकतर पूजा चर लग्न कर्क और दिस्वभाव लग्न मिथुन मे ही होते है जिसके परिणाम भी अच्छे नही मिलते. 

- सिंह या वृष् लग्न मे पूजन करे*- दीपावली का विशेष पूजन स्थिर लग्न मे ही शुभ रहता है,या तो वृषभ लग्न मे पूजन करे, जो की सामान्यतः रात्रि 8 बजे के पहले होता है, वही सिंह लग्न जो मध्य रात्रि मे सामान्यतः रात्रि 12 बजे से 4 बजे के बीच ही आता है यह सर्व श्रेष्ठ लग्न है जिसमे जातक वैभव,आर्थिक उन्नति और सफलता प्राप्त करता है,इस समय आप किसी विद्वान ब्राहमण से मिलकर विधि विधान से पूजन कर सकते है. 

- ज्योतिष में धन और लक्ष्मी का कारक*- शुक्र ग्रह को माना गया है. सबसे ज्यादा धन देने में यही ग्रह समर्थ है. शुक्र ग्रह को शुक्राचार्य/दैत्याचार्य भी कहाँ जाता है. वृषभ और तुला राशि का स्वामी शुक्र ही होता है. तुला राशि शुक्र की मूल त्रिकोण अर्थात सबसे प्रिय राशि है. व्यय भाव अर्थात पत्रिका का 12वां स्थान इसकी सबसे प्रिय जगह है. 12वीं राशि मीन में यह उच्च राशि का होता है. इस ग्रह को भोग प्रिय ग्रह कहा गया है. इसलिये पत्रिका के बारहवें भाव जिसे खर्च, शय्या स्थान भी कहा जाता है, वहां यह ग्रह सबसे शानदार परिणाम देता है. यदि आपकी कुंडली में यह ग्रह अच्छी स्थिति में है तो आपको शानदार जीवन जीने को मिलेगा. शुक्र की नीच राशि कन्या होती है. जहा ये ग्रह अच्छे परिणाम नही देता.

- शुक्र की शुभ स्थिति* 

पत्रिका में वृषभ, तुला तथा मीन राशि का शुक्र हो तो जातक यदि दरिद्र परिवार में भी जन्मा हो तो अमीर बन जाता है. यदि किसी भी राशि का शुक्र बारहवें भाव में हो तो जातक को वैभवपूर्ण जीवन जीने कॊ मिल ही जाता है. यदि पत्रिका के 6ठे भाव मॆ स्थित होकर भी यह ग्रह जब 12वे स्थान कॊ देखता है तो अच्छे परिणाम देता है. पत्रिका के दूसरे तथा सातवें मॆ बैठा शुक्र शादी के बाद आर्थिक स्थिति को शानदार कर देता है.

- पत्नी, प्रेमिका व सुंदर वाहन*

शुक्र ग्रह को प्रेमिका माना गया है. संसार मॆ समस्त तरह का प्रेम इसी ग्रह से देखा जाता है.राधा कृष्ण का दिव्य प्रेम शुक्र ग्रह से ही सम्भव है. संसार मॆ समस्त सुंदरता इस ग्रह से ही है.शानदार तथा महँगे वाहन, मकान इस ग्रह की कृपा से ही सम्भव है.

- शनि परम मित्र

जीवन मॆ कड़ी मेहनत से ही लक्ष्मी प्राप्ति होती है चाहे वह कर्म कैसा भी हो. हां एक बात अवश्य है की आपके कर्मफल भोगना पड़ता है. शनि व शुक्र का विशेष प्रेम है शुक्र की राशि तुला मॆ शनि उच्च राशि का होता है. यानी आपने जी तोड़ परिश्रम किया है तो लक्ष्मी कृपा आपको अवश्य प्राप्त होगी.

स्वच्छता पसंद है शुक्र ग्रह को

दीवाली के पहले लक्ष्मी पूजन के लिये हम सभी जगह सफाई करते है रंग रोगन भी करते है साफ वस्त्र पहनते है. इस तरह हम शुक्र ग्रह को अपने अनुकूल बनाने का प्रयास करते हैं. यदि आप स्वच्छ रहते है (निर्धन भी स्वच्छ रह सकता है) तथा कड़ी मेहनत करते है तो निश्चित रूप से आप पर लक्ष्मी मां की कृपा होगी.

- भगवान विष्णु, लक्ष्मी तथा भ्रगु ऋषि में समझौता*-मां लक्ष्मी हमेशा क्षीरसागर में शेषनाग में विश्राम कर रहे भगवान विष्णु की चरण सेवा करती हैं. एक बार त्रिदेव के क्रोध की परीक्षा हेतु ऋषि भ्रगु ने क्षीरसागर में शयन कर रहे भगवान विष्णु के वक्षस्थल पर प्रहार किया था. जिससे रुष्ट होकर माता लक्ष्मी ने ब्राह्मणों कों दरिद्र होने का शाप दिया. बदले में भ्रगु ने भी मां लक्ष्मी को श्राप दिया. इस झगडे को भगवान विष्णु ने सुलझाया. उन्होने कहा, जहाँ ब्राह्मण अपनी पूजापाठ व आशीर्वाद देगा वहा लक्ष्मी को आना ही पड़ेगा साथ ही जो व्यक्ति ब्राह्मणों को दान देगा उसे ही लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होगी.

- गुरुकृपा व पितृ कृपा प्राप्त करे*-यदि आप धन लक्ष्मी प्राप्त करना चाहते है तो इसके लिये आपको कड़ी मेहनत, स्वच्छता के अलावा गुरु, ब्राह्मण कृपा व आशीर्वाद आवश्यक है. यदि ब्राह्मण और गुरु रुष्ट है तो आपकी लक्ष्मी अन्यत्र चली जायगी.