देवी दुर्गा के नौ रूप हैं, जिनकी नवरात्रि में आराधना की जाती है। देवी दुर्गा का चौथा स्वरूप कूष्मांडा है। देवी कूष्मांडा, सिंह पर सवार हैं और सूर्यलोक में निवास करती हैं, जो क्षमता किसी भी अन्य देवी-देवता में नहीं है, इसलिए जब कोई कारक ग्रह अस्त हो जाए तो देवी कूष्मांडा की आराधना करनी चाहिए। 

देवी कूष्मांडा अष्टभुजा धारी हैं और अस्त्र-शस्त्र के साथ माता के एक हाथ में अमृत कलश भी है।  देवी कूष्मांडा की पूजा-अर्चना से असाध्य रोगों से मुक्ति मिलती है। 

देवी कूष्मांडा की पूजा-अर्चना से सूर्य ग्रह की अनुकुलता प्राप्त होती है इसलिए सिंह राशिवालों को देवी की आराधना से संपूर्ण सुख की प्राप्ति होती है। जिन श्रद्धालुओं की सूर्य की दशा-अन्तरदशा चल रही हो उन्हें भी देवी कूष्मांडा की पूजा-अर्चना करनी चाहिए। 

सम्मान, सफलता आदि की कामना रखनेवाले श्रद्धालुओं को देवी कूष्मांडा की आराधना करनी चाहिए। जिन श्रद्धालुओं के पिता से मतभेद हों वे संकल्प लेकर देवी कूष्मांडा की आराधना करें, विवाद से राहत मिलेगी। 

देवी की इस मंत्र से पूजा-अर्चना करें...  देवी कूष्माण्डायै नम:॥