देवी दुर्गा का पांचवां स्वरूप स्कंदमाता है।  देवी स्कंदमाता, सिंह पर सवार हैं। देवी स्कन्दमाता की चार भुजाएं हैं, माता अपने दोनों हाथों में कमल का फूल धारण करती हैं और एक हाथ सें भगवान कार्तिकेय को अपनी गोद में लिए बैठी हैं जबकि माता का चौथा हाथ श्रद्धालुओं को आशीर्वाद प्रदान करता है। 

जो व्यक्ति जाने/अनजाने भ्रूण हत्या जैसे अपराध में प्रत्यक्ष/अप्रत्यक्ष शामिल रहे हों उन्हें देवी स्कन्दमाता से सच्चे दिल से क्षमा मांगनी चाहिए और पूजा-अर्चना करके प्रायश्चित व्रत करना चाहिए, साथ ही भविष्य में ऐसी गलती नहीं करने का संकल्प लेना चाहिए। 

देवी स्कन्दमाता की पूजा-अर्चना से बुध ग्रह की अनुकुलता प्राप्त होती है इसलिए मिथुन और कन्या राशिवालों को देवी की आराधना से संपूर्ण सुख की प्राप्ति होती है। 

जिन श्रद्धालुओं की बुध की दशा-अन्तरदशा चल रही हो उन्हें भी देवी स्कन्दमाता की पूजा-अर्चना करनी चाहिए।  कला/व्यवसाय के क्षेत्र में सफलता के लिए श्रद्धालुओं को देवी स्कन्दमाता की आराधना करनी चाहिए। 

जिन श्रद्धालुओं के बहन/बेटी से मतभेद हों वे संकल्प लेकर देवी स्कन्दमाता की आराधना करें, विवाद से राहत मिलेगी। 

देवी की इस मंत्र से पूजा-अर्चना करें... ओम देवी स्कन्दमातायै नम:॥