आज दुनिया भर में वल्र्ड टॉयलेट डे मानया जा रहा है। ऐसे में इस खबर में हम आपको भारत के एक ऐसे गांव से रूबरू करवा रहे हैं, जहां के लोगों ने साफसफाई के मामले में मिसाल पेश की है। असम के गुवहाटी से करीब 150 किलोमीटर दूर ग्वालपाड़ा जिला है। इस जिले में एक ब्लॉक है बालिजाना और ग्वालपाड़ा से भी करीब 15 किलोमीटर कच्चे रास्ते पर होकर आप पहुंच सकते हैं रंगसापाड़ा गांव।


रंगसापाड़ा इसाई बहुल्य गांव है। करीब 800 लोगों की आबादी का यह गांव साफ-सफाई के मामले में पूरे असम के मस्तक पर चांद बनकर चमक रहा है। यहां हर घर में पक्का शौचालय बना हुआ है। गांव के लोग हफ्ते में एक बार मिलकर पूरे गांव की सफाई करते हैं। हर घर के बाहर कुड़ेदान लगा हुआ है और घर का जैविक और अजैविक कूड़े को अलग-अलग बरतनों में रखा जाता है।

गांव के मुखिया है रॉबर्टसन मोमिन बताते हैं कि उनके गांव के लोग 1990 से ही साफ.सफाई पर खासा ध्यान दे रहे हैं और इसकी शुरूआत कुछ इस तरह हुई कि सभी गांव वालों ने एक बैठक कर गांव के लिए कुछ करने का फैसला किया। रॉबर्टसन मोमिन बताते हैं कि गंदगी, नशाखोरी, खुले में शौच और आपस में होने वाले लड़ाई-झगड़े के खिलाफ मिलकर मुकाबला करने की पूरे गांव ने सौगंध ली। इस सौगंध को तोडऩे वाले के लिए सजा भी सभी गांववालों ने मिलकर ही तय की।

आज से करीब 27 साल पहले इस छोटे से गांव में गंदगी फैलाने वाले, नशा करने वाले या फिर लड़ाई-झगड़ा करने वालों पर 5100 रुपए का जुर्माना तय किया गया था। खास बात यह है कि पंचायत ने जुर्माना तो तय कर दिया, लेकिन जुर्माना वसूलने की कभी नौबत तक नहीं आई। बता दें कि असम के मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने पिछले साल एक भव्य कार्यक्रम में गांव को 45 लाख रुपये की नकद राशि देकर सम्मानित किया।