एनआरसी है जिन लोगों के नाम छूटे हैं तथा जिनके नाम खामियां हैं, उन्हें दावा और आपति दर्ज कराने के लिए 10 अगस्त से फॉर्म मिलने की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी । हाल ही में एनआरसी का दूसरा मसौदा प्रकाशित हुआ, जिसमें  विभिन्न तरह की खामियां पाई गई । 

कोर्ट में सुनवाई के बाद कहा गया था कि एनआरसी से जिन लोगों के नाम छूटे हैं या उनमें किसी तरह की  खामियों है, इसे दूर करने के लिए  10 अगस्त से फॉर्म देने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी । एनआरसी सेवा केंद्रों में फार्म वितरण की प्रक्रिया 10 अगस्त से 28 अगस्त तक चलेगी । इसके बाद 30 अगस्त से 28 सितंबर तक फॉर्म जमा कराया जाएगा । 

एनआरसी सेवा केंद्रों पर व्यक्तिगत रूप से लोगों को यह बताया जाएगा कि किस कारण से उनका नाम एनआरसी मसौदा में शामिल नहीं हुआ है । गौरतलब है कि अंतिम मसौदा जारी होने के बाद यह देखा गया कि राज्य के अल्पसंख्यक बहुल जिलों के विपरीत उपरी  असम सहित पुरे राज्य में लोगों के नाम एनआरसी में शामिल नहीं हुए है । 

खासकर घुसपैठिए बहुल धुबडी जिले में कम संख्या में लोगों के नाम छूटे है । मालूम हो कि राज्य में वर्षों से रह रहे बहुतायत हिंदीभाषी लोगों के नाम एनआरसी मसौदा में शामिल नहीं हुए, जिसके कारण हिंदीभाषियों में काफी क्षोभ है । हिंदीभाषियों का आरोप है कि एनआरसी अधिकारियों ने हिन्दी के कागजातों को ठंडे बस्ते में डाल दिया । बहुत से कागजातों को वैरीफिकेशन के लिए संबंधित राज्यों को भेजा ही नहीं गया । 

इस कारण बहुसंख्यक हिंदीभाषियों का नाम एनआरसी में शामिल नहीं हुआ हैं। गौरतलब है कि गत दिनों सर्वोच्च न्यायालय ने इस सिलसिले में केंद्र सरकार को सख्त निर्देश जारी किया था । इसके बाद केंद्रीय गृह मंत्रालय के संयुक्त सचिव (पूर्वोतर प्रभार) सत्येंद्र गर्ग, देश के महापंजीयक शैलेश, असम की मुख्य सचिव टीवाई दास के साथ ही एनआरसी के प्रदेश संयोजक प्रतीक हाजेला ने नार्थ ब्लॉक में बीते कल एक उच्च स्तरीय बैठक बुलाई गई थी । 

इस बैठक में एनआरसी की अगली प्रक्रिया के लिए एसओपी एवं मॉडलिटी तय करने पर विचार किया गया । 16 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट में होने वाली अगली सुनवाई के दौरान इसे पेश किया जाएगा । मालूम हो कि बड़ी संख्या में भारतीयों के नाम छूटने पर असम के साथ-साथ पुरे देश में रोष है । संसद के वर्तमान मानसून सत्र के दोरान इस मुद्दे पर काफी हंगामा हुआ था ।