61 वर्षीय महिला को डिटेंशन कैंप से निकालने और उनका नाम दोबारा NRC सूची में जुड़वाने के लिए लिए त्रिपुरा के एक हेडमास्टर की पहल खूब सराहना हो रही है। महिला का नाम असम एनआरसी की अंतिम सूची से बाहर हो गया था। लेकिन हेडमास्टर दिलीप दास ना सिर्फ अपना पैसा खर्च कर असम पहुंचे बल्कि उन्होंने महिला की सहायता के लिए 10 दिन की छुट्टी भी ली।


बता दें कि असम के नलबाड़ी में 61 वर्षीय गीता रानी सरकार के शैक्षणिक रिकॉर्ड को प्रमाणित करने के लिए फॉरेनर्स ट्राइब्यूनल द्वारा चारिलम एचएस स्कूल के हेडमास्टर दिलीप दास को तलब किया गया। दणिण चारिलम गांव में जन्मीं गीता ने दावा किया था कि उन्होंने इसी स्कूल से पढ़ाई की है। दास फिलहाल इसी स्कूल में हेडमास्टर हैं।


दास के पास महिला की नागरिकता के दावे को पुष्ट करने के लिए आवश्यक दस्तावेजों को मेल करने का विकल्प था। पर, वह नहीं चाहते थे गीता को वहां से निकालने में किसी भी तरह की कोई कमी शेष रह जाए। यही वजह है कि उन्होंने दस्तावेजों के साथ खुद वहां जाने का फैसला लिया। उन्होंने अपने पैसे पर हवाईजहाज के टिकट के साथ ही 10 दिनों की अर्जित छुट्टी ली और गुवाहाटी के लिए निकल पड़े।


एनआरसी की अंतिम सूची के समय गीता रानी कोई प्रामाणिक दस्तावेज नहीं सौंप पाईं। हालांकि उनके बेटे और अन्य परिवार के सदस्यों का नाम एनआरसी में शामिल हो गया लेकिन वह बाहर हो गईं। इसके बाद उन्हें डिटेंशन कैंप में भेज दिया गया। 60 के दशक की शुरुआत में त्रिपुरा सरकार द्वारा गीता रानी के नाम पर जारी नागरिकता प्रमाणपत्र को NRC अधिकारियों ने अस्वीकार कर दिया था।


फॉरेनर्स ट्राइब्यूनल ने स्कूल प्रमाण पत्र को सत्यापित करने के लिए बिशालगढ़ के उप-विभागीय मैजिस्ट्रेट को नोटिस भी दिया लेकिन कोई भी रेकॉर्ड नहीं मिल पाया। 10 अक्टूबर को गीता के दावे के मुताबिक (दावे में गीता ने बताया था कि उन्होंने छठवीं क्वलास की पढ़ाई चारिलाम स्कूल से की थी)फॉरेनर्स ट्राइब्यूनल ने संबंधित स्कूल के हेडमास्टर को दस्तावेजों की पुष्टि करने के लिए तलब किया। इसके बाद दास ने गीता से जुड़ी जानकारी निकालने का फैसला किया और वह उनसे जुड़े सभी दस्तावेज प्राप्त करने में सफल रहे।


इसके बाद दास ने खुद असम जाने का निर्णय लिया। 23 अक्टूबर को वह अधिकारियों के सामने पेश हुए और उन्होंने सारे दस्तावेज सौंप दिए। हमारे सहयोगी टाइम्स ऑफ इंडिया से बातचीत में दास ने कहा, उन्होंने शुरुआती पढ़ाई इसी स्कूल से की थी। ट्राइब्यूनल दस्तावेजों से आश्वस्त हुआ और फिर गीता को एनआरसी में शामिल किया गया। गौर हो कि जब इस नेक पहल की जानकारी त्रिपुरा शिक्षा विभाग को हुई तो उसने इस छुट्टी को दास की आधिकारिक ड्यूटी में बदलने की पेशकश की है।