सरकार भले ही साइबर क्राइम पर अंकुश लगाने के लिए कड़े से कड़े नियम बना रही हो, लेकिन इससे जुड़े शातिर हर दिन नया तरीका खोजकर सरकार को ही चैलेंज कर देते हैं। दरअसल ताजा मामला दिल्ली का है, जहां एक महिला ने गूगल सर्च के जरिए कस्टमर केयर का नंबर लिया और उसके खाते से एक लाख रुपए उड़ गए। 

दरअसल दिल्ली के सीमापुरी की रहने वाली एक महिला के ई-वॉलेट में कोई दिक्कत आ रही थी। इसके बाद महिला ने गूगल में उस कंपनी के कस्टमर केयर का नंबर सर्च किया और यहीं से खेल शुरू हुआ। गूगल में कस्टमर केयर का नंबर सर्च करने पर महिला को एक नंबर मिला। इसके बाद महिला ने इस नंबर पर कॉल किया। इसके बाद महिला ने उस शख्स को कस्टमर केयर समझक अपने डेबिट कार्ड की पूरी जानकारी दी। 

 

इसके बाद जब तक महिला को इस बात का अहसास होता तबतक उसके अकाउंट से 1 लाख रुपये गायब हो गए थे। दरअसल यह नंबर कस्टमर केयर का नहीं, बल्कि धोधाधड़ी करने वाले का था। चोरों ने गूगल सर्च में अपना नंबर एडिट करके डाला था। अब सवाल यह है कि आखिर गूगल सर्च में चोर ने अपना नंबर कैसे डाला और आपको इससे कैसे बचना चाहिए।

 

दरअसल गूगल की एक पॉलिसी है जिसे यूजर जेनेरेटेड कॉन्टेंट पॉलिसी कहा जाता है। इस पॉलिसी के तहत गूगल मैप्स या सर्च पर दी गई जानकारी को कोई भी एडिट कर सकता है। गूगल सर्च में दी गई जानकारियों में मोबाइल नंबर के साथ-साथ एड्रेस भी होता है। अब धोखाधड़ी करने वाले लोग गूगल मैप्स की इसी पॉलिसी का गलत फायदा उठाकर लोगों को बेवकूफ बना रहे हैं और उनके बैंक अकाउंट से पैसे उड़ाने के चाल रहे हैं। ये चोर गूगल मैप्स और गूगल सर्च रिजल्ट में बैंक के असली फोन नंबर की जगह अपना मोबाइल नंबर डाल रहे हैं।

अब ऐसे में आप गूगल सर्च में आए फोन नंबर पर कॉल करते हैं और आपका फोन फ्रॉड करने वालों के पास जाता है और वे बैंक के कर्मचारी की तरह आपसे बातें करते हैं। इसके बाद आपसे आपके एटीएम और क्रेडिट कार्ड के बारे में जानकारी मांगी जाती है और आप उसे बैंक का कर्मचारी समझकर पूरी जानकारी दे देते हैं। इसके बाद उनकी पहुंच आपके बैंक खाते तो हो सकती हैं और आपके खाते खाली हो सकते हैं।