नागालैण्ड की एक महिला ने अपने पति के अंतिम संस्कार के लिए बेटे को गिरवी रख दिया। वह बेटे को वापस हासिल करने के लिए पैसा कमाना चाहती थी। उसने पूरे देश में दर बदर की ठोकरें खाई। अब वह वापस नागालैण्ड लौट रही है। 20 साल की रीता दीमापुर के नजदीक एक टी एस्टेट में मजदूरी करती थी। उसे हर दिन 40 रुपए मजदूरी मिलती थी। 

अक्टूबर 2016 में उसके पति मुकेश की बुखार और अन्य मेडिकल परेशियानियों से मौत हो गई। मुकेश भी मजदूरी करता था। रीता  के पास अपने पति के अंतिम संस्कार के लिए पैसे नहीं थे। उसने अपने बेटे सोनू को 2 हजार रुपए में एक साहूकार के पास गिरवी रख दिया। लोन चुकाने के लिए रीता विभिन्न स्रोतों से पैसे एकत्रित करने के लिए उसने कई महीनों तक कोशिश की। 

रीता के जेठ ने बताया कि आगरा में पप्पू नाम का एक शख्स उसे नौकरी दिलाने में मदद कर सकता है। कुछ दिन पहले रीता आगरा पहुंची। पप्पू ने उसे बंधक बना लिया। इसके बाद रीता  बच्चों (तीन साल की नंदिनी और डेढ़ साल के अरुण) के साथ सड़कों पर भीख मांगने लगी। शनिवार को सामाजिक कार्यकर्ता ने उसे शाह मार्केट के नजदीक देखा। इसके बाद पता चला कि रीता के साथ क्या हुआ था। 

रीता को कचरे के ढेर से खाना बीनती और अपना व बच्चों का पेट भरती थी। पानी की एक बोतल चुराने पर स्थानीय दुकानदार ने उसकी पिटाई भी कर दी। सामाजिक कार्यकर्ता नरेश पारस ने कहा, रीता ने उसे बताया कि उसने मदद के लिए पुलिस से मदद मांगी थी लेकिन उसे झिड़क दिया गया। पुलिस ने इन आरोपों को खारिज किया है। इसके बाद पारस और कुछ अन्य सोशल वर्कर्स ने नागालैण्ड में पुलिस से संपर्क किया।

 नागालैण्ड पुलिस ने रीता को वापस उसके घर भेजने को कहा ताकि वे मामले को अपने हाथ में लेकर उसके बेटे की तलाश कर सकें। वहीं स्थानीय व्यापारी रीता की मदद के लिए आगे आए। उन्होंने तीन हजार रुपए एकत्रित किए। साथ ही उसके खर्चे के लिए अन्य तरह की मदद की। पारस ने कहा, रीता को रविवार सुबह उसके बच्चों के साथ ब्रह्मपुत्र मेल में बिठाया गया। दिमापुर पुलिस ने रीता के बेटे को ढूंढने के लिए कोशिशें तेज कर दी है। दिमापुर के एसिस्टेंट पुलिस कमिश्नर अकुम लाम ने कहा कि जब महिला विस्तृत जानकारी दे देगी तो तो हम उसके बेटे और साहूकार को ढूंढ लेंगे।