दो साल के असमंजस के बाद सीबीआई ने मणिपुरी छात्र प्रवीश चनम की मौत के मामले पर केस दर्ज कर लिया है। अब वह छात्र की मौत और उससे जुड़े जिम्मेदारों का राज खोलेगी। अब बड़ा सवाल ये है कि क्या इतना लंबा वक्त बीतने के बाद सीबीआई को इस घटना से जुड़े सबूत मिल पाएंगे। क्या वह उन सवालों के जवाब खोज पाएगी, जिसे जानने के लिए छात्र के घरवाले पिछले दो सालों से सड़कों पर आंदोलन करते आ रहे हैं।

प्रवीश चनम मणिपुर के इंफाल में अपने माता-पिता, बहन और भाई के साथ रहते थे। सितंबर 17 में उसकी नोएडा में रहस्यमय हालात में मौत के बाद पुलिस ने हादसा बताते हुए फाइल बंद कर दी थी। इसके बाद मणिपुर के सीएम एन बीरेन सिंह ने यूपी के सीएम आदित्यनाथ योगी से मिलकर इस मामले की सीबीआई जांच की मांग की थी। सीएम योगी ने उनका आग्रह मानते हुए सीबीआई को जांच के लिए पत्र लिखा, लेकिन सीबीआई ने इसे सामान्य मामला मानते हुए हाथ में लेने से इंकार कर दिया। उसके बाद से प्रवीश के घरवाले दिल्ली में प्रदर्शन करने के अलावा हर सप्ताह मणिपुर में प्रदर्शन करते आ रहे थे। अब जाकर सीबीआई ने इस मामले को हाथ में लेते हुए प्राथमिकी दर्ज की है।

इंफाल में बीए प्रथम वर्ष में पढ़ने वाला प्रवीश 8 सितंबर 17 को सफदरजंग दिल्ली में रहने वाले अपने दोस्तों अशोक, टेरेसा और सचिन के साथ मिलकर ग्रेनो एक्सपो सेंटर में होने वाले कंसर्ट में भाग लेने गया था। इसके बाद वह लापता हो गया। देर रात आयोजकों ने बेसुध हालत में उसे सेक्टर 30 जिला अस्पताल में भर्ती करवाया। अगले दिन सुबह करीब 6: 30 बजे वह अस्पताल से उठकर चला गया। उसी शाम को करीब 5 बजे वह जिला अस्पताल से 300 मीटर दूर निठारी मुर्गा मार्केट के पास मरणासन्न हालत में पड़ा मिला। पुलिस लेकर जिला अस्पताल लेकर पहुंची, जहां उसने दम तोड़ दिया।

चचेरी बहन लिन फान के अनुसार गौतमबुद्धनगर पुलिस ने इस मामले में हर जगह लापरवाही बरती। प्रवीश के गायब होने के अगले दिन 9 सितंबर 17 को उन्होंने नॉलेज पार्क थाने में गुमशुदगी दर्ज करवा दी थी। इसके बावजूद पुलिस ने उसे ढूंढने की कोई कोशिश नहीं की और न ही वायरलेस मेसेज करवाया। कहा कि कहीं पीकर पड़ा होगा, आ जाएगा। उन्हें 13 सितंबर को पता चला कि प्रवीश की 9 सितंबर की शाम को ही मौत हो गई थी और थाना सेक्टर 20 पुलिस ने बिना उसकी शिनाख्त कराए 12 सितंबर को अज्ञात में उसका अंतिम संस्कार कर दिया। उसके शरीर पर तमाम जगह गहरी चोटें थी, जो हत्या की ओर इशारा कर रही थी, लेकिन पुलिस ने कहा कि बाइक की टक्कर से मौत हुई है। भीड़भाड़ वाली जगह में कथित एक्सिडेंट के बावजूद कोई गवाह नहीं मिला। फिर भी पुलिस ने हादसा बताकर फाइल बंद कर दी।

लिन फान के अनुसार 8 सितंबर को जब उसे अस्पताल में भर्ती करवाया गया, उस वक्त वह होश में था। फिर भी अस्पताल प्रशासन ने उसका नाम- पता जानने की कोशिश क्यों नहीं की। अगली शाम को जब उसे दोबारा अस्पताल में लाया गया तो फिर भी अस्पताल प्रशासन ने उसे क्यों नहीं पहचाना। इसके अलावा घटना के वक्त साथ रहे तीनों दोस्तों की भूमिका पर भी परिजनों को शक है। घटना के बाद पुलिस ने प्रवीश के 10 दोस्तों को बुलाकर पूछताछ की लेकिन वे तीनों नहीं आए और न ही बाद में कोई बयान दिया।