नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी प्रसाद यादव ने केंद्र के कृषि कानूनों को किसान विरोधी बताते हुए फिर इनकी वापसी की मांग की है। गुरुवार को अपने ट्वीट में उन्होंने कहा कि किसान आंदोलन के समर्थन और किसान विरोधी काले कानून के विरुद्ध गत दिवस बिहार के सभी जिला मुख्यालयों पर राजद और महागठबंधन ने प्रदर्शन किया। यह विरोध जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि पूंजीपरस्त इस किसान विरोधी एनडीए सरकार को हटाकर ही दम लेंगे।

वहीं पूर्व उपमुख्यमंत्री सुशील मोदी ट्वीट के जरिए दिल्ली से बिहार तक चल रहे आंदोलन पर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि किसान आंदोलन को भारत-विरोध की गलत दिशा में ले जाने के लिए विदेशी फंडिंग से चलने वाले लगभग 100 छोटे-बड़े संगठनों की संलिप्तता पूरे देश के लिए चिंता का विषय है। कहा कि जेएनयू के वामपंथी छात्र, महाराष्ट्र का मछुआरा संघ, सीटू और एआईकेएस जैसे गैर किसान संगठनों की भागीदारी के बाद किसानों के मुद्दे पर बिहार को जाम करने की माकपा की धमकी का एनडीए कड़ा राजनीतिक प्रतिरोध करेगा।

एक अन्य ट्वीट में उन्होंने कहा कि किसानों को स्थानीय मंडी और देश के खुले बाजार में कहीं भी सबसे अच्छे दाम पर फसल बेचने की आजादी देने वाले कृषि कानून को लेकर ज्यादातर चिंताएं निराधार या राजनीति प्रेरित हैं। केंद्र सरकार पंजाब-हरियाणा के किसानों की आशंका दूर करने में लगी है। उनके प्रतिनिधियों से सरकार का शीर्ष नेतृत्व जब पूरी गंभीरता और सहानुभूति से लगातार बातचीत कर समाधान निकालने का प्रयास कर रहा है, तब पुरस्कार वापसी से दबाव बनाने की कोशिश माहौल बिगाड़ कर टकराव बढाने की नीयत जाहिर करती है।