बहुजन समाज पार्टी प्रमुख मायावती ने गुरुवार को समाजवादी पार्टी और उसके अघ्यक्ष अखिलेश यादव पर बड़ा हमला बोला और कहा कि राज्यसभा चुनावों में पार्टी सपा के प्रत्याशियों को हरायेगी और जरूरत पड़ी तो भाजपा का भी साथ देगी। मायावती ने आज ट्वीट कर कहा कि हमारी पार्टी ने लोकसभा चुनाव के दौरान सांप्रदायिक ताकतों से लड़ने के लिए सपा से हाथ मिलाया था, लेकिन उनके परिवारिक कलह के कारण बसपा के साथ गठबंधन कर भी वो ज्यादा लाभ नहीं उठा पाए। 

मायावती ने स्पष्ट कहा है कि राज्यसभा चुनावों में हम सपा प्रत्याशियों को बुरी तरह हराएंगे। इसके लिए हम अपनी पूरी ताकत झोंक देंगे। अगर भाजपा या किसी अन्य पार्टी के प्रत्याशी को अपना वोट देना पड़े तो वो भी करेंगे। इसके साथ ही मायावती ने राज्यसभा चुनाव में बगावत करने वाले सात विधायकों के निलंबन का भी एलान किया। बसपा प्रमुख ने कहा कि लोकसभा चुनाव के बाद सपा ने संपर्क बंद कर दिया था , इसीलिए पार्टी ने अपना रास्ता बदल लिया। 

उन्होंने कहा कि मैं इस बात का भी खुलासा करना चाहती हूं कि जब हमने उत्तर प्रदेश में लोकसभा चुनाव के लिए सपा के साथ चुनाव लड़ने का फैसला किया तो हमने इसके लिए बहुत मेहनत की, लेकिन जब से यह गठबंधन हुआ था तब से सपा प्रमुख की मंशा दिखने लगी थी। सपा की पारिवारिक कलह के कारण गठबंधन का कोई लाभ नहीं मिल सका। परिवार के लोग ही एक दूसरे को हराने में में लगे थे।दूसरी ओर बसपा और भाजपा के बीच बढ़ रही नजदीकी सपा को रास नहीं आई । 

बसपा प्रत्याशी की जीत पक्की करने के लिये भाजपा ने राज्यसभा के होने वाले चुनाव में सिर्फ आठ प्रत्याशी ही उतारे थे । लेकिन सपा ने बसपा का खेल बिगाड़ने के लिये अंतिम समय में 27 अक्तूबर को एक निर्दलीय प्रत्याशी को समर्थन दे दिया। हड़बड़ी में किये गये नामांकन में सपा के समर्थन वाले प्रत्याशी का कल पर्चा खारिज हो गया और बसपा की राह आसान हो गई। अब सभी का निर्विरोध चुना जाना तय हो गया है। आगामी दो नवम्बर को नाम वापसी के आखिरी दिन सभी के निर्विरोध चुने जाने की घोषणा कर दी जायेगी ।