अफगानिस्तान पर तालिबान कब्जा कई तरह के कानूनों में बदलाव कर रहा है। कुछ देश तालिबान के साथ हैं और कुछ देश तालिबान के खिलाफ है। आंतकी तालिबान अफगान की सत्ता पर काबिज होकर दुनिया देश को दोस्ती का पैगाम भेज रहा है। भारत से कारोबार का नाता तोड़ हाल ही में तालिबान ने देश को यह कहते हुए दोस्ती का संदेश भेजा है कि ‘हमसे कोई खतरा नहीं है ’।
 

बता दें कि अफगानिस्तान में तालिबान के खतरे को देखते हुए भारत ने भी अपने दूतावास बंद कर दिए हैं। कब्जा जमाते ही तालिबान ने भारत से संपर्क साधा और  राजनयिक संबंध बनाए रखने की चाहत जाहिर की थी। इसी वक्त “तालिबान के वरिष्ठ नेता शेर मोहम्मद अब्बास स्टेनकजई एक आश्चर्यजनक अनुरोध के साथ भारतीय पक्ष के पास पहुंचे थे-क्या भारत अफगानिस्तान में अपनी राजनयिक उपस्थिति बनाए रखना चाहेगा ”?


जानकारी मिली है कि तालिबान ने अनुरोध किया था कि भारत काबुल में अपनी राजनयिक मौजूदगी को जारी रखे और दूतावास बंद न करे। हालांकि, इस बारे में भारतीय पक्ष द्वारा कोई बयान नहीं आया है। दरअसल, बीते सोमवार और मंगलवार को भारत द्वारा सैन्य विमानों से अफगानिस्तान से अपने करीब 200 लोगों को निकालने से ठीक पहले तालिबान ने अनौपचारिक तौर पर भारत को इस अनुरोध से अवगत कराया था।


भारतीय पक्ष और उसके अफगान समकक्षों द्वारा किए गए एक त्वरित मूल्यांकन से यह निष्कर्ष निकला कि अतीत को देखते हुए तालिबान की ओर से अनुरोध पर विश्वास नहीं किया जा सकता और भारतीय राजनयिकों और अन्य को निकालने की योजना के अनुसार आगे बढ़ना चाहिए।