पंजाब विधानसभा चुनाव परिणामों में अरविंद केजरीवाल की पार्टी आम आदमी पार्टी की सुनामी आ चुकी है। अब यह साफ हो गया है कि राज्य में Aam Aadmi Party सरकार बनाने जा रही है। बदलाव की इस सुनामी में कांग्रेस (Congress), शिरोमणि अकाली दल (SAD) और भाजपा इस कदर बर्बाद हो गए कि उन्हें आने वाले पांच साल में अपना कैडर संभालकर रखना भी मुश्किल हो जाएगा।  इस चुनाव में पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह (Amarinder Singh) को पटियाला विधान सभा सीट से हार का सामना करना पड़ा है और उन्हें 19797 वोटों से आम आदमी पार्टी के उम्मीदवार अजितपाल सिंह कोहली ने मात दी।

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हालांकि, कैप्टन अमरिंदर के सीएम रहते पंजाब में बदलाव की लहर इतनी प्रबल नहीं थी, लेकिन उन्हें सत्ता से हटाने के बाद यह लहर आंधी में तबदील होती दिखाई दी क्योंकि कांग्रेस अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू ने अपनी ही सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए उसे कटघरे में खड़ा किया।

सिद्धू ने पंजाब की हालत के लिए कैप्टन अमरिंदर को हर बात के लिए जिम्मेदार ठहराया। कैप्टन को सत्ता से हटाने के बाद खुद सीएम बनने की कोशिश की, नहीं बने तो सीएम चेहरा बनने की कोशिश की, चन्नी को सीएम बनाया तो उनके खिलाफ मोर्चा खोला। 

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इसके अलावा बदलाव की इस सुनामी का सबसे बड़ा फैक्टर किसान आंदोलन रहा हालांकि इसका पहले से हाशिए पर चल रही भाजपा को ज्यादा नुकसान नहीं हुआ क्योंकि वह 1996 में SAD की दयादृष्टि पर 23 सीटों पर चुनाव लड़ती थी। अलग होने के बाद वह आज भी वहीं खड़ी नजर आ रही है, हालांकि यह देखना बाकी है कि उसका वोट शेयर कहां खड़ा है। किसान आंदोलन के दौरान किसान और जनता ने कांग्रेस और अकाली दल की भूमिका को संदेह से ही देखा, जिसका सीधा फायदा AAP को हुआ।