विश्व इतिहास में 6 अगस्त को बेहद ही काला दिन माना जाता है, क्योंकि इसी दिन अमेरिका ने जापान पर पहला परमाणु बम गिराया था। इसके बाद जो हुआ, हिरोशिमा की जमीन उसकी गवाह आज तक है। अगस्त 1945 तक जापान द्वितीय विश्व युद्ध हार चुका था। इस बात की जानकारी अमेरिका और जापान दोनों ही देशों को थी। फिर भी जापान ने युद्ध लडऩा जारी रखा।

वर्ष 1945 में जुलाई के मध्य में अमेरिकी राष्ट्रपति हैरी एस ट्रूमन को परमाणु बम के सफल परीक्षण की जानकारी मिली। राष्ट्रपति के रूप में, ये हैरी ट्रूमन का निर्णय था कि युद्ध को समाप्त करने के लक्ष्य के लिए हथियार का उपयोग किया जाए। साथ ही, अगस्त 1945 में मान लिया गया कि पारंपरिक बमबारी से जापान को झुकाया नहीं जा सकता है।

ट्रूमन और उनके सहयोगियों ने निर्णय लिया कि शहर पर बमबारी करना ही ठीक रहेगा। वहीं, शहर को खाली करने की चेतावनी जारी करने से बम गिराने वाले जहाज का क्रू खतरे में पड़ सकता है। टार्गेट एक ऐसा शहर भी होना चाहिए था, जहां सैन्य प्रोडक्शन किया जाता होगा। इसके अलावा, अमेरिका ने इस बात का भी खयाल रखा कि टार्गेट ऐसा शहर नहीं होना चाहिए, जो जापानी संस्कृति का हिस्सा रहा हो। इस तरह हिरोशिमा का चुनाव किया गया और फिर छह अगस्त 1945 को पहला परमाणु बम शहर पर गिरा दिया गया। इस धमाके में 80 हजार लोग मारे गए थे, वहीं इतने ही घायल हुए थे। इसके तीन दिन बाद ही एक और परमाणु बम जिससे फैट मैन कहा जाता है नागासाकी के ऊपर सुबह 11 बजे गिराया जिसमें 40 हजार लोग मारे गए. सर्वे के मुताबिक नागासाकी में नुकसान बहुत कम हुआ क्योंकि यह बम एक घाटी में गिरा और उसी वजह से उसका असर ज्यादा नहीं फैला. इसका असल केवल 1.8 वर्ग मील तक ही हुआ.