पांच बार मुख्यमंत्री रहे पवन सिंह चामलिंग का शासन आखिरकार गुरुवार को चौबीस साल सत्ता में रहने के बाद खत्म हो गया। सिक्किम डेमोक्रेटकि फ्रंट, सिक्किम क्रांतिकारी मोर्चा के आगे हार गई। जहां एसडीएफ ने पंद्रह सीटों पर जीत दर्ज की है, वहीं 2013 में गठित हुई एसकेएम 17 सीटों पर जीत गई है। जो कि 32 सदस्यीय विधाननसभा के लिए एक ज्यादा ही है।

दो सीटों पर चामलिंग की जीत

वहीं चुनाव आयोग ने आधिकारिक रूप से ये जानकारी दी है कि चामलिंग ने दो विधानसभा की सीटों पर जीत दर्ज की है। ज्ञात हो कि वो विधानसभा की दो सीटों पर चुनाव लड़ रहे थे, नामची और पोकलोक कामरांग विधानसभा सीट। जहां एक तरफ उन्होंने नामची सीट पर 377 वोटों के अन्तर से जीत दर्ज की है। वहीं दूसरी ओर पोकलोक कामरांग सीट पर एसडीएफ सुप्रीमो ने अपने प्रतिद्वंदी खारका बहादुर राय को 2,899 मतों के अंतर से हराया है। बता दें कि चामलिंग 1994 से सिक्किम के मुख्यमंत्री रहे हैं।

नहीं चला यहां मोदी का जादू

अरुणाचल प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी बहुमत हासिल कर रही, लेकिन सिक्किम में प्रधानमंत्री मोदी का जलवा फीका पड़ गया। पार्टी को एक भी सीट यहां हासिल नहीं हो सकी। वैसे भी यहां का इतिहास रहा है कि यहां कांग्रेस और बीजेपी की लोकसभा चुनाव में जमानत जब्त हो जाती है।

इस सीट पर कांग्रेस भी अपना खाता नहीं खोल सकी

सिक्किम लोकसभा सीट साल 1977 में अस्तित्व में आई। चार जिलों वाले सिक्किम राज्य में सिर्फ एक ही लोकसभा सीट है, जिस पर अब तक 11 बार लोकसभा चुनाव हो चुके हैं, जिसमें से सबसे अधिक 6 बार लगातार सिक्किम डेमोक्रेटिक फ्रंट ने जीत दर्ज की है। इस सीट पर साल 1985 में एक बार उपचुनाव भी हो चुका है, जिसमें सिक्किम संग्राम परिषद (SSP) ने जीत दर्ज की थी। वर्तमान में इस सीट को सिक्किम डेमोक्रेटिक फ्रंट का गढ़ माना जाता है, जो साल 1996 से लगातार जीत दर्ज करती आ रही थी।