विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कहा है कि कोरोना वायरस की दूसरी लहर पहले से भी भयावह दिख रही है। डब्ल्यूएचओ के मुताबिक महामारी फैलने के बाद से इतने कम समय में पहली बार इतने ज्यादा केस सामने आ रहे हैं। डब्ल्यूएचओ ने कहा है कि लगातार चार सप्ताह से पूरी दुनिया में लगातार 22 लाख से ज्यादा केस आ रहे हैं और 19 अक्टूबर को खत्म हुए सप्ताह में तो पूरी दुनिया में 29 लाख से ज्यादा केस सामने आए हैं और 30 अक्टूबर को खत्म हुए सप्ताह की बात करें तो पिछले एक सप्ताह में पूरी दुनिया में 32 लाख से ज्यादा केस सामने आए हैं, जबकि सिर्फ यूरोप में 30 अक्टूबर को खत्म हुए सप्ताह में सबसे ज्यादा 15 लाख से ज्यादा केस सामने आए हैं। 

पूरे यूरोप में कुल कोरोना संक्रमण की संख्या अब डेढ़ करोड़ से अधिक हो चुकी है और अमरीका में ये संख्या दो करोड़ के पार पहुंच चुकी है, जिसमें सिर्फ यूएसए में ये संख्या 90 लाख से अधिक है। हाल में किए गए एक अध्ययन में दावा किया गया है कि स्पेन में शुरू हुआ कोरोना वायरस का म्यूटेशन (उत्परिवर्तन) यूरोप में संक्रमण की भयावह दूसरी लहर के पीछे का कारण हो सकता है। वायरस के प्रसार और उसके विकास को ट्रैक करने वाले वैज्ञानिकों की एक अंतरराष्ट्रीय टीम ने कहा है कि वायरस का 20ए.ईयू1 नामक संस्करण, गर्मियों के बाद से ब्रिटेन में 90 फीसदी मामलों का कारण है। 

वैज्ञानिकों का मानना है कि वायरस का यह म्यूटेशन स्पेन में 80 फीसदी, आयरलैंड में 60 फीसदी और स्विट्जरलैंड व फ्रांस में 40 फीसदी तक संक्रमण के पीछे का कारण है। वहीं ब्रिटेन में बढ़ रहे कोरोना वायरस के मामलों को देखते हुए देश में एक बार फिर से लॉकडाउन लागू किया जा सकता है। प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन अगले हफ्ते से राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन लागू कर सकते हैं। जॉनसन के वैज्ञानिक सलाहकारों ने कहा है कि देश को वायरस के दंश से बचाने के लिए यही एकमात्र तरीका है। सैज समिति के वैज्ञानिकों के अनुसार कोरोना वायरस सबसे खराब स्थिति की ओर बढ़ रहा है। ऐसे में लॉकडाउन ही विकल्प है। अभी तक यह स्पष्ट नहीं है कि नया लॉकडाउन किस रूप में होगा या इसे कब तक लागू करके रखा जाएगा। वैज्ञानिकों का कहना है कि वायरस से इन सर्दियों में ब्रिटेन में 85,000 लोगों की मौत हो सकती है।