विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की मुख्य वैज्ञानिक डॉ. सौम्या स्वामीनाथन का कहना है कि ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय और दवा कंपनी ऐस्ट्राजेनेका की ओर से विकसित कोविड-19 टीके का परीक्षण रुकने से एजेंसी बहुत चिंतित नहीं है। 

उन्होंने कहा कि एक प्रतिभागी के बीमार होने के बाद ऐस्ट्रोजेनेका की कोविड-19 वैक्सीन का ट्रायल रुकना चेतावनी है, लेकिन शोधकर्ताओं को हताश नहीं होना चाहिए। डॉ. स्वामीनाथन का कहना है कि अनुसंधान में उतार-चढ़ाव आते रहते हैं। मनुष्यों पर अभी तक हुए परीक्षण के आंकड़े काफी अच्छे हैं और उनमें कुछ देर के लिए इस रोग से लड़ने की क्षमता विकसित हो रही है। टीका लोगों को रोग से बचाने में सक्षम है या नहीं यह तय करने के लिए हजारों-लाखों लोगों पर परीक्षण करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि हो सकता है कि साल के अंत तक कुछ परिणाम निकले, या फिर अगले साल नतीजे आएं। हमें परिणाम पाने के लिए थोड़ा धैर्य रखना होगा।

आपको बता दें कि ट्रायल के दौरान एक शख्स के वैक्सीन की वजह से बीमार पड़ने की खबरों के बाद ऑक्सफोर्ड की वैक्सीन का ट्रायल रोक दिया गया है। अमेरिका, ब्राजील, दक्षिण अफ्रीका, भारत समेत 60 लोकेशंस पर इस टीके का फेज 3 क्लिनिकल ट्रायल चल रहा था। उधर ट्रायल पर रोक के बावजूद भी AstraZeneca के CEO पास्कल सॉरियट को वैक्सीन के जल्द उपलब्ध होने की उम्मीद है। उनका कहना है कि यह वैक्सीन इस साल के अंत तक या अगले साल की शुरुआत तक आ सकती है। वैक्सीन के ट्रायल को उस वक्त रोक दिया गया था जब एक वॉलंटिअर पर इसका गंभीर असर दिखाई दिया था।