ब्रू समुदाय के लोक 23 सालों से भारत में शरणार्थी बने हुए थे जिनको अब भारत की नागरिकता दी जा रही है। इसी के साथ लंबे समय से चली आ रही ब्रू समुदाय की समस्या का हल करने के लिए केंद्र सरकार ने ऐलान किया है। अब ब्रू समुदाय के लोग स्थायी रूप से त्रिपुरा में बसेंगे। 1997 में मिजोरम से विस्थापित होने के बाद ब्रू समुदाय के हजारों लोग त्रिपुरा में बनाए गए शरणार्थी कैंपों में रह रहे थे। जुलाई 2018 में उन्हें वापस भेजने के लिए एक समझौता हुआ लेकिन यह लागू नहीं हो सका। दरअसल, ब्रू समुदाय के लोगों ने फिर से हिंसा के डर से मिजोरम जाने से इनकार कर दिया। 

ब्रू समुदाय मिजोरम का सबसे बड़ा अल्‍पसंख्‍यक आदिवासी समूह है। इस समुदाय के करीब 33,000 लोग पिछले 23 सालों से उत्‍तरी त्रिपुरा के शरणार्थी शिविरों में रह रहे हैं। यह आदिवासी समूह अपने को म्‍यांमार के शान प्रांत का मूल निवासी मानता है। ये लोग कुछ सदियों पहले वहां से मिजोरम में आकर बसे थे। बता दें कि 1990 के दशक में इनका बहुसंख्‍यक मिजो लोगों से स्‍वायत्‍त डिस्ट्रिक्‍ट काउंसिल के मुद्दे पर खूनी संघर्ष हुआ था। इसके बाद लगभग 5000 से ज्यादा परिवार मिजोरम से पलायन कर गए थे। मिजो जनजाति ब्रू को 'बाहरी' कहती है। 

हालांकि, कुछ ब्रू शरणार्थी मिजोरम वापस लौटे भी और इन लोगों को सरकार की ओर से मदद दी गई। अक्टूबर 2019 में लगभग 51 परिवार एक साथ मिजोरम लौटे। अधिकारियों के मुताबिक, बीते 10 सालों में दो हजार से अधिक परिवार मिजोरम लौट आए हैं और वहां बिना किसी मुश्किल के रह रहे हैं। इसी क्रम में सरकार की ओर से प्रयास किए जा रहे थे कि ब्रू समुदाय के लोग मिजोरम लौट आएं।

इससे पहले 2018 में त्रिपुरा के शरणार्थी शिविरों में खाने-पीने की सप्लाई रोक दी गई थी। सरकार ने ब्रू समुदाय के लोगों से अपील की थी कि वे अपने मूल निवास को लौट जाएं। ज्यादातर लोगों ने हिंसा के डर से वापस जाने से इनकार कर दिया था। जो लोग जाने को तैयार भी थे, उन्होंने भी सरकार से मांग की थी कि पुनर्वास के लिए उन्हें और ज्यादा पैसे दिए जाएं। 

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