संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत की अगुवाई में जब अफगानिस्तान को अपने हालात बयां करने का मौक मिला तो पाकिस्तान पर उसका गुस्सा फूट पड़ा। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की कमान संभाल रहे भारत ने अफगानिस्तान में तालिबानी हिंसा के खिलाफ वैश्विक समुदाय को एकजुट कर कूटनीतिक दबाव बनाने के लिए शुक्रवार को एक बैठक कराई। भारत की अगुवाई में शुक्रवार रात को हुई बैठक में अफगानिस्तान में पाकिस्तान पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि वह तालिबान को सुरक्षित पनाह देता है। 

संयुक्त राष्ट्र (संरा) में अफगानिस्तान के राजदूत गुलाम एम इसाकजई के संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) में तालिबान को एक सुरक्षित पनाहगाह और रसद की आपूर्ति प्रदान करने के लिए पाकिस्तान को दोषी ठहराये जाने पर शनिवार को इस्लामाबाद की भी बौखलाहट सामने आई और उसने सफाई दी। पाकिस्तान के विदेश विभाग ने एक बयान में कहा, 'यूएनएससी में अपने बयान में अफगानिस्तान के प्रतिनिधि ने गलत सूचना का प्रचार किया और अंतरराष्ट्रीय समुदाय को गुमराह करने के लिए पाकिस्तान के खिलाफ निराधार आरोप लगाए।'

विदेश विभाग ने कहा कि पाकिस्तान इन आरोपों को स्पष्ट रूप से खारिज करता है और उसने बार-बार अंतरराष्ट्रीय समुदाय के साथ स्पष्ट और साफ शब्दों में शांति तथा स्थिरता पर अपना दृष्टिकोण साझा किया है। भारत की अध्यक्षता में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में अफगानिस्तान पर शुक्रवार की ब्रीफिंग में अफगानी राजदूत इसाकजई ने तालिबान के हमले के कारण अफगानिस्तान में विकट स्थिति के बारे में बात की थी। उन्होंने कहा, 'यह लड़ाई कोई गृहयुद्ध नहीं है, बल्कि अफगानों के पीछे लड़े गए आपराधिक और आतंकवादी नेटवर्क का युद्ध है।'

पाकिस्तान पर सीधा आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा, 'महत्वपूर्ण बात यह है कि तालिबान एक सुरक्षित पनाहगाह का आनंद लेना जारी रखता है और पाकिस्तान से उनकी युद्ध मशीन तक आपूर्ति और रसद लाइन का विस्तार जारी रहता है।' इस बीच, संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि टी.एस. तिरुमूर्ति ने शुक्रवार को अपने ब्रीफिंग में कहा कि अफगानिस्तान में स्थायी शांति के लिए, क्षेत्र में आतंकवादी सुरक्षित पनाहगाहों और पनाहगाहों को तुरंत नष्ट किया जाना चाहिए और आतंकवादी आपूर्ति श्रृंखला को बाधित किया जाना चाहिए। उनका इशारा स्पष्ट तौर पर पाकिस्तान के लिए ही था।