व्हाट्सएप को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है कि इस पर से लोगों का भरोसा उठ रहा है और 28 फीसदी लोग इसें छोड़ना चाहते हैं। ऐसा तब हो रहा है जब व्हाट्सएप की नई प्राइवेसी पॉलिसी आई है। इसने लोगों के भीतर डर पैदा कर दिया है। इसके अलावा इस मैसेजिंग ऐप की ओर से जबरन डेटा लेने की कोशिश ने जनता के भीतर गुस्सा पैदा कर दिया है। हाल ही में हुए एक नई शोध में खुलासा हुआ है कि व्हाट्सएप से लोग खुश नहीं हैं।
भारत सरकार द्वारा व्हाट्सएप से इसकी नई यूजर डेटा प्राइवेसी पॉलिसी को वापस लेने के आदेश के बाद शुक्रवार को एक राष्ट्रव्यापी अध्ययन में यह पता चला है कि 79 प्रतिशत यूजर्स व्हाट्सएप की सेवाएं जारी रखने के लिए पुनर्विचार कर रहे हैं। गुरुग्राम स्थित मार्केट रिसर्च फर्म साबइर मीडिया रिसर्च के ताजा अध्ययन में कहा गया है कि व्हाट्सएप की नई प्राइवेसी पॉलिसी के मद्देनजर 79 प्रतिशत यूजर्स व्हाट्सएप की सेवाएं जारी रखने के लिए पुनर्विचार कर रहे हैं। जबकि 28 प्रतिशत यूजर्स इसे छोड़ना चाह रहे हैं।

स्टडी रिपोर्ट के मुताबिक जितने लोगों का सर्वे किया गया उनमें से 41 प्रतिशत यूजर्स व्हाट्सएप को छोड़कर टेलीग्राम अपनाना चाह रहे हैं जबकि 35 प्रतिशत यूजर्स सिग्नल को तरजीह दे रहे हैं।

सीएमआर के आईसीजी हेड सत्य मोहंती ने कहा है कि व्हाट्सएप की नई प्राइवेसी पॉलिसी पर चर्चा लगातार जारी है, लेकिन यह चर्चा निजता को तरजीह देने वाले उपभोक्ताओं से कहीं आगे की है क्योंकि कुछ यूजर्स व्हाट्सएप का इस्तेमाल बंद करना चाह रहे हैं, जबकि कुछ यूजर्स टेलीग्राम अथवा सिग्नल जैसे विकल्पों पर विचार कर रहे हैं।

मोहंती ने कहा कि इसकी वजह यह है कि टेलीग्राम अथवा सिग्नल लोगों के बीच चर्चा का विषय बने हुए हैं और इनमें कई तरह के फीचर्स भी हैं। गौरतलब है कि व्हाट्सएप की नई प्राइवेसी पॉलिसी की घोषणा के बाद यह अपने कई मौजूदा यूजर्स खो रहा है। साथ ही इसके भावी यूजर्स की संख्या भी घट सकती है।

गौरतलब है कि केंद्रीय सूचना.प्रौद्योगिकी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स मंत्रालय ने हाल ही में व्हाट्सएप को एक पत्र लिखा था। हालांकि कंपनी ने अपनी सफाई में कहा है कि यूजर्स की चैट, बिजनेस अकाउंट की चैट समेत कोई भी जानकारी किसी के साथ साझा नहीं की जाएगी। बहरहाल, यह मामला अभी दिल्ली हाई कोर्ट में विचाराधीन है।