कोरोना वायरस महामारी के बाद दुनिया में इंटरनेट का यूज काफी तेजी से बढ़ा है। इंटरनेट की मदद से ही वर्क फ्रॉम होम और ऑनलाइन स्टडी जैसे काम आसानी से किए जा रहे हैं। लेकिन इससे ऑनलाइन फ्रॉड के मामले भी बढ़े हैं। ऐसे में लेकिन आपको बता दें कि इंटरनेट का जितना आप और हम यूज करते हैं, वो इस वर्चुअल वर्ल्ड का महज 5 से 10 फीसदी ही हिस्सा है। इंटरनेट की एक बड़ी दुनिया है जहां तक हम नहीं पहुंच ही पाते। इस दुनिया को डार्क वेब कहा जाता है। डार्क वेब एक ऐसी जगह है, जहां ड्रग्स, हथियार, अंडरवर्ल्ड, हैकिंग और गैरकानूनी काम होते हैं।

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डार्क वेब सुनते ही सबसे पहले मन में यही ख्याल आता है कि आखिर यह क्या है। यह वेब का अनछुआ हिस्सा है, जहां हर कोई नहीं पहुंच सकता है। इसके जरिए आम लोगों को ठगा जाता है और कई प्रकार के काले धंधे किए जाते हैं।


हम वेब के जिस हिस्से का इस्तेमाल करते हैं, उसे सर्फेस वेब कहा जाता है। सर्फेस वेब के मुकाबले डार्क वेब बिल्कुल अलग है। डार्क वेब में कंटेंट का रेगुलेशन नहीं है। डार्क वेब तक पहुंचने के लिए स्पेशल परमिशन की जरूरत होती है।

अब आप सोच रहे होंगे कि डार्क वेब का इस्तेमाल कौन लोग करते हैं। माना जाता है कि दुनियाभर भर में होने वाले गैरकानूनी और गलत काम की प्लानिंग वहीं होती है। इसके अलावा व्हिसलब्लोअर भी इसका इस्तेमाल करते हैं। खोजी पत्रकार और सरकार-कॉरपोरेट के घोटालों को उजाकर करने के लिए डार्क वेब का इस्तेमाल करते हैं।


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आपको बता दें कि डार्क वेब का इस्तेमाल करना अवैध नहीं है। यहां कोई भी पहुंच सकता है, लेकिन डार्क वेब का इस्तेमाल गैरकानूनी कामों के लिए नहीं होना चाहिए।