Corona वायरस के चलते लोगों में Black Fungus, White Fungus, Yellow Fungus बीमारी तेजी से फैल रही है। कोरोना वायरस से संक्रमित होने के बाद शरीर की इम्युनिटी कमजोर होने का कारण कई बीमारियां हमला करती हैं। इन्हीं बीमारियाों में से एक है, ब्लैक फंगस, कोरोना की दूसरी लहर में मई महीने ब्लैक फंगस के केस सामने आने लगे। इसके बाद व्हाइट फंगस सामने आया और फिर कुछ इलाकों से येलो फंगस फैलेन की भी खबरें आयीं।

कोरोना की तरह अब देश में ब्लैक फंगज की दवाइयों को भी कमी हो गई है। उस पर मुश्किल यह है कि अगर टाइम पर सही इलाज नहीं मिला तो फिर जान तक जा सकती है। आज हम आपको बताएंगे कि आखिर यब ब्लैक फंगस, व्हाइट फंगस क्या है? कोरोना के बीच यह कितना खतरनाक है और इससे बचने के उपाय क्या हैं।

दिल्ली के एम्स अस्पताल में न्यूरोलॉजी विभाग की प्रमुख डॉक्टर पद्मा श्रीवास्तव के अनुसार ब्लैक फंगस कई नया इंफेक्शन नहीं है। यह पहले भी हम बहुत बार देख चुके हैं। जो भी मरीज जिनकी इम्युनिटी बहुत कमजोर है, खासतौर पर जिनकी डायबटीज़ बहुत ज्यादा है, कैंसर के मरीज़ हैं या फिर इम्यूट सिस्टम कमजोर हैं उनमें यह फंगल इन्फैक्शन पाया जाता है। खास बात यह है कि कोरोना की इस दूसरी लहर में हम अचानक से ब्लैक फंगस के बहुत ज्यादा मरीज देख रहे हैं। यह संक्रमण की ऐसी लहर है, जिसे पहले कभी नहीं देखा गया।

उनके मुताबिक यह फंगस इन्फेशन ऑपरचुनिस्टिक है, यानी सामान्य तौर पर यह हमारे आस पास ही रहती है। यह हवा में, मिट्टी में या फिर किसी भी नमी वाली जगह में पायी जाती है लेकिन हमारे पास इम्युनिटी का एक कवच होता है, जिससे यह हमारे ऊपर असर नहीं डालती है। लेकिन जब इम्युनिटी कम होती है तो यह हमला करता है। कोरोना होने के बाद इम्युनिटी वैसे कमजोर हो जाती है। इसके साथ ही कोरोना के मरीज को स्टेरॉयड भी दिए जाते हैं, जिससे इम्यून सिस्टम कमजोर हो जाता है।
उन्होंने कहा कि यह खतरा तो है, क्योंकि  ब्लैक फंगस पहले भी खतरनाक बीमारी थी। अब भी जो केस आ रहे हैं, इन केस में अगर सही इलाज नहीं मिला तो इसमें मौत की संभावना 80 % तक है। इसलिए खतरा तो बहुत ज्यादा है। अगर यह संक्रमण सिर्फ नाइनेस से हुआ तो हल्का है लेकिन हम जो देख रहे हैं कि कोरोना होने के बाद इसमें साइनेस, ब्रेन और आंख भी शामिल हो जा रही है। जब इसमें ब्रेन शामिल हो जाता है तो फिर सर्जरी के बाद भी इसमें बचना बेहद मुश्किल हो जाता है।
श्रीवास्तव के अनुसार यह छूत की बामारी नहीं है, यह एक श्ख्स से दूसरे शख्श में ट्रांसफर नहीं होता है। अगर किसी को कोरोना से ठीक होने के बाद ब्लैक फंगस की बीमारी हो जाती है तो उन्हें छूने से या उनके आसपास रहने यह बीमारी नहीं फैलती है।

उनके मुताबिक शुरुआती लक्षणों की बात करें तो अगर आप कोरोना से ठीक हुए हैं उसके बाद आपको अचानक सिर दर्द होता है, आंखों के पास या आंखों के पीछे की तरफ दर्द होता है या फिर नाक बंद हो जाती है, नाक से खून आने लगना, काले रंग का पानी आना, चेहरे पर सूजन आना, पलकें गिरना ऐसा कुछ होता है तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। ऐसे लक्षण दिखने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें, बीमारी बढ़ने का इंतजार ना करें।

डॉक्टर के मुताबिक अगर आपको डायबटीज़ है तो अपनी शुगर कंट्रोल में रखें। लगातार डॉक्टर के संपर्क में रहें, खुद से इलाज करने की कोशिश बिल्कुल ना करें। शुगर पर नियंत्रण बहुत जरूरी है। इसके साथ ही साफ सफाई भी बहुत जरूरी है। आप जो मास्क लगा रहे हैं, उसमें लगातार साफ सफाई रखें।

व्हाइट फंगस को लेकर डॉक्टर पद्मा श्रीवास्तव ने बताया, ''व्हाइट फंगस, ब्लैक फंगस से अलग तरीके की बीमारी है। इसका असली नाम, कैंडिडियासिस है। यह ज्यादातर आईसीयू मे दाखिल मरीजों में पाया जाता है। कहीं दिनों से एंटी बायोटिक दवाइयां ले रहे हैं। ऐसे में एंटीबायोटिक के साथ यह फंगल इंफेक्शन भी फैल जाता है। यह आईसीयू में अक्सर पाया जाता है।