योग आदित्यानाथ कट्टर हिन्दू माने जाने वाली हस्ती है। इन्होंने गलती से मिस्टैक करते हुए भगवान बजरंगबली क गिरवासी का करार दे दिया। लोगों को योगी की यह रास नहीं आई और कोर्ट के सामने धार्मिक भावना को आहत करने का फरमान पेश कर दिया। जिससे मऊ कोर्ट ने मामले को गंभीरता से लेते हुए मुख्यमंत्री योगी को नोटिस जारी कर दिया है।

 
दरअसल, जनसभा के दौरान सीएम योगी ने कहा था कि  '' बजरंगबली ऐसे लोक देवता हैं जो स्वयं बनवासी हैं,  गिरवासी हैं, दलित हैं, वंचित हैं '' इस बयान पर आपत्ति जताते हुए एक शख्स ने परिवाद दाखिल किया था। दाखिल करने वाले मऊ के दोहरीघाट थाना क्षेत्र के निवासी नवल किशोर शर्मा है। नवल किशोर ने परिवाद में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को आरोपी बनाते हुए प्रकरण में विचार करने के लिए उनको तलब करने का अनुरोध किया था।

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नवल किशोर शर्मा ने कहा था कि 'मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का वक्तव्य देश, प्रदेश, जाति, वर्ग और धर्म- समुदाय के लिए काफी महत्व रखता है '। यह बताते हुए याची ने आरोप लगाया था कि सीएम योगी द्वारा 28 नवंबर 2018 को राजस्थान के अलवर जिले के मालाखेड़ा में एक जनसभा के दौरान कहा गया था कि बजरंगबली ऐसे लोक देवता हैं जो स्वयं बनवासी हैं,  गिरवासी हैं, दलित हैं, वंचित हैं। उनके इस भाषण से परिवादी की धार्मिक भावनाओं को ठेस लगी है।

अब इस आदेश के विरुद्ध याची ने कल जिला जज की कोर्ट में निगरानी दाखिल किया, जिसमें जिला जज की कोर्ट ने ACJM / MP MLA कोर्ट के आदेश के विरुद्ध इस निगरानी को स्वीकार करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को नोटिस जारी कर 26 अप्रैल की तारीख सुनवाई के लिए तय किया है।