पश्चिम बंगाल उपचुनाव (West Bengal by-election) में सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (TMC) की जीत के साथ कांग्रेस के अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि सबसे बड़ा नुकसान उनकी पार्टी को हुआ है, जिसने औपचारिक रूप से भाजपा को विपक्ष की जगह दे दी है, जो अब राज्य में दूसरे नंबर पर है। यह उत्तर प्रदेश और बिहार के बाद पश्चिम बंगाल को तीसरा बड़ा राज्य बनाता है, जहां कांग्रेस की मौजूदगी खत्म हो रही है।

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (Chief Minister Mamata Banerjee) ने 84,709 वोट हासिल किए, उन्होंने भाजपा की प्रियंका टिबरेवाल (Priyanka Tibrewal) को निर्णायक रूप से हराया, जिन्होंने भवानीपुर उपचुनाव में 26,350 वोट हासिल किए, जबकि माक्र्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के श्रीजीब बिस्वास केवल 4,201 वोट हासिल करने में सफल रहे। जंगीपुर और समसेरगंज (Jangipur and Samserganj elections) में भी तृणमूल ने निर्णायक बढ़त बनाए रखी है। कांग्रेस, जिसने भवानीपुर से चुनाव नहीं लड़ा था, 2016 के चुनावों के बाद विधानसभा में 44 विधायकों के साथ दूसरी सबसे बड़ी पार्टी थी, लेकिन अब उसके पास राज्य से सिर्फ एक लोकसभा और एक राज्यसभा सांसद नहीं है। पार्टी को वस्तुत: नए सिरे से शुरुआत करनी होगी, क्योंकि अधिक से अधिक नेता तृणमूल की ओर बढ़ रहे हैं।

उधर, उत्तर प्रदेश (congress in UP) में पार्टी के पास केवल एक लोकसभा सांसद है और 2017 में चुने गए 7 विधायकों में से दो ने पार्टी छोड़ दी है। बिहार में भी कांग्रेस के पास एक लोकसभा सीट है और 19 विधायक हैं। इन राज्यों में 162 लोकसभा सीटों (यूपी 80, पश्चिम बंगाल 42 और बिहार 40) के लिए कांग्रेस की स्थिति अस्थिर है।इन सभी राज्यों में, क्षेत्रीय दलों - यूपी में सपा/बसपा, बिहार में राजद और अब पश्चिम बंगाल में तृणमूल ने कांग्रेस को परिधि में धकेल दिया है। विशेषज्ञों का कहना है कि पार्टी अगर 2024 के आम चुनावों में अपनी छाप छोडऩा चाहती है तो उसे अपनी रणनीति में बदलाव करना होगा।