चीन के हुबेई प्रांत के वुहान से फैले जानलेवा कोरोना वायरस की चपेट में पूरी दुनिया आ चुकी है। इस वायरस से अब तक 30 हजार से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है और लाखों बीमार हैं। इसी बीच, कोरोना के पहले मरीज की वो पहली मरीज भी सामने आ गई है जिससें पहले हुबेई और फिर पूरी दुनिया में यह खतरनाक वायरस फैल गया।
चीन के बदनाम हन्नान बाजार में समुद्री केकड़ा बेचने वाली 57 वर्षीय महिला वेई गुजियान कोरोना की पहली मरीज थीं। वुहान म्युनिसिपल हेल्थ कमिशन ने पुष्टि की है कि वेई उन 27 मरीजों में थीं जिसका कोविड-19 का टेस्ट पॉजिटिव आया था। आइए जानते हैं कोरोना केस सामने आने से इसके फैलने की पूरी टाइमलाइन

10 दिसंबर- वेई को सर्दी-जुकाम की शिकायत। वह वुहान में एक स्थानीय क्लीनिक में गईं। उन्हें सामान्य फ्लू का एक इंजेक्शन दिया गया।

11 दिसंबर- वेई को लगातार कमजोरी महसूस हो रही थी। वह शहर के एक अन्य अस्पताल में गईं।

16 दिसंबर- वेई लगातार थकान महसूस कर रही थीं। इसके बाद वह वुहान के सबसे बड़े अस्पताल वुहान यूनियन अस्पताल गईं।

दिसंबर को आखिर में- जब डॉक्टरों ने पाया कि वुहान सी फूड मार्केट से कोरोना वायरस फैल रहा है तो वेई को क्वांरटीन कर दिया गया।

जनवरी 2020- वेई अस्पताल से स्वस्थ होकर अपने घर गईं।

-एक महीने के इलाज के बाद वेई पूरी तरह ठीक हो गईं। माना जा रहा है कि वेई को एक टॉइलट से कोरोना का संक्रमण फैला। इस टॉइलेट को एक मांस कारोबारी भी यूज करता था। यहीं नहीं, कथित तौर पर वेई के साथ काम करने वाली उसकी बेटी, एक भतीजी और उसका पति भी इस खतरनाक वायरस की चपेट में आए। वेई को लगा था कि उन्हें सीजनल फ्लू है और वह एक छोटे से क्लिनिक में गईं। उन्हें इंजेक्शन लगाया गया, लेकिन राहत नहीं मिली। वह मार्केट में सामान बेचती रहीं। पांच दिनों के बाद हालत खराब होने पर वह वुहान के ही एक बड़े अस्पताल में गईं।

-कोरोना के संक्रमण के बाद वुहान के इस सी फूड मार्केट को अनिश्चित काल के लिए बंद कर दिया गया है।

-वेई ने बताया कि अगर चीन सरकार तुरंत कार्रवाई करती तो कोरोना वायरस को फैलने से रोक सकती थी। वेई को कोरोना का 'पेंशेंट जीरो' माना जा रहा है। हालांकि अभी इस को लेकर स्पष्टता नहीं है कि क्या वेई ही कोरोना की पहली मरीज है। चीन की मीडिया में किसी 70 साल के शख्स को पहला मरीज बताया जा रहा है। मेडिकल जर्नल Lanct में दावा किया गया है कि कोविड-19 से पीड़ित पहले शख्स की पहचान 1 दिसंबर 2019 को ही हो गया था।