उत्तर और पश्चिमी भारत के लोग इस बार भीषण गर्मी झेल रहे हैं। इस बीच ब्रिटेन में हुए हालिया अध्ययन में दावा किया गया है कि जलवायु परिवर्तन के कारण उत्तर-पश्चिम भारत और पाकिस्तान में रिकॉर्ड तोड़ गर्मी की आशंका बन रही है। इन क्षेत्रों में प्रचंड लू के थपेड़े सौ गुना ज्यादा झेलने होंगे। ऐसा जलवायु परिवर्तन के प्रभाव के कारण होने का पूर्वानुमान जताया गया है।

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ब्रिटिश मौसम कार्यालय के एक अध्ययन में मौसम के बदलाव को लेकर नए खुलासे किए गए हैं। इसमें शोधकर्ताओं ने बताया कि उत्तर-पश्चिम भारत और पाकिस्तान में जलवायु परिवर्तन से मौसम पर असर पड़ रहा है। इस क्षेत्र में साल 2010 के रिकॉर्ड तापमान के बाद अब हर तीन साल के बाद प्रचंड लू चलने की आशंका है। यह रिपोर्ट ऐसे समय में आई है, जब आने वाले दिनों में उत्तर-पश्चिम भारत में तापमान नई ऊंचाई पर पहुंचने की संभावना व्यक्त की गई है।

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इसके पहले स्काटलैंड के वैज्ञानिक स्कॉट डंकन ने ट्वीट कर जानकारी दी थी कि आने वाले समय में भारत और पाकिस्तान के कुछ क्षेत्रों में तापमान 50 डिग्री सेन्टीग्रेट तक पहुंच जाएगा। स्कॉट ने ग्राफिक्स के माध्यम से यह समझाने की भी कोशिश की थी कि भारत और पाकिस्तान में मार्च में ही कितनी भीषण गर्मी पड रही है। उन्होंने अर्थ बर्कले के डेटा के हवाले से यह जानकारी दी थी।

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भारत मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार, 19 मई से उत्तर पश्चिम और मध्य भारत में भीषण लू के नए चरण की शुरूआत होने का अनुमान है। मंगलवार को उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, विदर्भ, बिहार और महाराष्ट्र में अलग-अलग स्थानों पर लू की स्थिति का अनुभव किया गया। उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में 46.9 डिग्री सेल्सियस तापमान देश में सबसे अधिक अधिकतम तापमान दर्ज किया गया। जम्मू और कश्मीर में कुछ स्थानों पर अधिकतम तापमान सामान्य से ऊपर (3.1 डिग्री सेल्सियस से 5 डिग्री सेल्सियस तक) देखा गया।

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विभाग के मुताबिक, गुरुवार को उत्तर प्रदेश, राजस्थान, पंजाब, हरियाणा और गुजरात के कुछ हिस्सों में अलग-अलग स्थानों पर इसी तरह की लू आने की संभावना है। 19 मई को उत्तर प्रदेश के अलग-अलग इलाकों में ,20 और 21 मई को मध्य प्रदेश, 19 एवं 20 मई को पंजाब, हरियाणा और 18 से 21 मई को राजस्थान में प्रचंड लू की संभावना है।

पाकिस्तान में शनिवार को तापमान 51 डिग्री सेंटीग्रेट तक पहुंचने के बाद हाल के दिनों में इस क्षेत्र में अत्यधिक प्री-मॉनसून लू के थपेड़ों का सामना करना पड़ा है। मौसम विज्ञान कार्यालय की ग्लोबल गाइडेंस यूनिट ने चेतावनी दी है कि गर्मी इस सप्ताह के अंत में फिर से बढ़ने की संभावना है। पाकिस्तान में कुछ स्थानों पर अधिकतम तापमान 50 डिग्री सेन्टीग्रेट तक पहुंचने की संभावना है, साथ ही रात में बहुत अधिक तापमान बना रहेगा।

इस अध्ययन में कंप्यूटर सिमुलेशन की मदद ली गई। कंप्यूटर सिमुलेशन में दो परिदृश्यों में मौसमी घटनाओं की तुलना की जाती है और यह पता लगाने का प्रयास किया जाता है कि भविष्य में इसके कितनी बार घटित होने की संभावना है। आपको बता दें कि इस क्षेत्र में 1900 के बाद से सबसे अधिक तापमान का अनुभव अप्रैल और मई में हुआ।

यह अध्ययन अप्रैल और मई 2010 में उत्तर-पश्चिम भारत और पाकिस्तान में गर्मी की लहर को आधार बनाकर किया गया। वैज्ञानिकों ने बताया कि यदि बडे पैमाने पर जलवायु परिवर्तन न हो रहा होता तो ऐसा चरम तापमान हर 312 वर्षों में केवल एक बार ही देखने को मिलता, मगर वर्तमान में स्थिति बिल्कुल प्रतिकूल है।

इस अध्ययन में यह अनुमान लगाने का प्रयास किया गया कि किस हद तक जलवायु परिवर्तन से भविष्य में ऐसी घटनाएं और अधिक होने की संभावना है। अध्ययन के लिए विशेषज्ञों की टीम का नेतृत्व करने वाले डॉ निकोस क्रिस्टिडिस ने बताया कि हमारे अध्ययन से पता चलता है कि जलवायु परिवर्तन गर्मी की तीव्रता को बढ़ा रहा है, जिससे तापमान 100 गुना अधिक होने की संभावना है। वैज्ञानिकों ने कहा,भविष्य में जलवायु परिवर्तन के प्रभाव का आकलन किया और चेतावनी दी कि आने वाले समय में अंजाम और भी बुरा होगा।

पड़ोसी देशों के मौसम का भारत पर असर:

नेपाल : बारिश और बाढ़ से हर साल भारत में तबाही

कहा जाता है कि भारत और नेपाल के बीच रोटी-बेटी का रिश्ता है। लेकिन इसके अलावा दोनों देशों के बीच मौसम का भी संबंध है। मौसम से होने वाले प्रभाव पर दोनों देशों के सुख-दुख एक हैं। मॉनसून के सीज़न में नेपाल और सीमा पार की स्थिति उत्तरी भारत में बाढ़ का कहर ढाती है। हर साल नेपाल के मौसम के असर के कारण उसकी सीमा से लगे बिहार के 38 में से 11 ज़िले बाढ़ की चपेट में आ जाते हैं। दरभंगा और समस्तीपुर हर साल विभीषिका झेलते हैं।

इसी तरह उत्तर प्रदेश में बहराइच समेत 19 ज़िलों पर बुरा असर पड़ता है। इससे जन-धन और फ़सलों को हर साल नुक़सान होता है। कुछ दशक पहले तक नदियों में आने वाली बाढ़ को अभिशाप नहीं बल्कि वरदान माना जाता था। नदियां अपने साथ सिल्ट के बजाय उपजाऊ मिट्टी लाया करती थीं, जिसका किसानों को लाभ होता था। तब नदियों में बाढ़ आती भी थी, तो पानी ठहरता नहीं था।

विशेषज्ञ मानते हैं कि दोनों देशों के सीमावर्ती तराई वाले इलाक़ों में पिछले दो दशक में तेजी से चेक डैम, सड़कें, रेल ट्रैक और विकास के अन्य प्रोजेक्ट पर काम हुआ है। निर्माण बढ़ने से पानी के प्राकृतिक बहाव के रास्ते बाधित हुए हैं। इससे कई इलाकों में नदियों में बाढ़ का पानी बहता नहीं, बल्कि ठहर जाता है।

पाकिस्तान : ठंड, गर्मी और आंधी पड़ोस से दाखिल होती हैं

सिर्फ नेपाल ही नहीं पड़ोसी देश पाकिस्तान से भी मौसम में बदलाव का भारत पर असर पड़ता है। शीतलहर, लू और आंधी के थपेड़े जब रेगिस्तानी इलाके से होकर भारत में प्रवेश करते हैं तो उनकी तीव्रता और दुष्प्रभाव बढ़ जाता है। मौसम विशेषज्ञों के मुताबिक, पाकिस्तान की तरफ से आने वाली हवाएं राजस्थान से होकर गुजरती हैं तो वो पूरी तरह से शुष्क हो ताजी हैं। जब ये सूखी हवाएं आगे बढ़तह हैं तो उसकी वजह से तापमान सामान्य से काफी ऊपर चला जाता है।

इसी तरह जब शीतलहर और आंधी चलती है तो उसका प्रभाव भी बढ़ जाता है। राजस्थान, मध्य प्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र, दिल्ली जैसे राज्यों में इसका सबसे ज्यादा असर पड़ता है। इसके अलावा जम्मू, हिमाचल, यूपी, हरियाणा, झारखंड, उड़ीसा, तेलंगाना तक इसका असर देखा जाता है।