सारी दुनिया कोरोना के कहर के कारण के तिल तिल तड़प रही है। और इसका जिम्मेदार चीन के ठहरा रही हैं। बता दें कि कोरोना पीड़ितों की उंगलियां चीन और वहां के 64 साल पुराने प्रतिष्ठित संस्थान इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी की ओर उठी हुई है और जांच के दौरान अब अमेरिका में इस केस में शामिल होता नजर आ रहा है। दरअसल, एक न्यूजपेपर ने खुलासा करते हुए कहा कि अमेरिका ने वुहान स्थित उस लैब को प्रयोग करने के लिए फंडिंग की थी, जिसके बारे में कहा जाता है कि वहीं से कोरोना वायरस का संक्रमण पूरी दुनिया में फैला।

चीन कोरोना अमेरीका की तिकड़म
1.    अमेरिका का फंड
न्यूज पेपर की खबर ने तमाम कड़ियों को जोड़ने की कोशिश की है। डेली मेल के मुताबिक वुहान की इस चीनी लैब को अमेरिकी सरकार ने 3.7 मिलियन डॉलर (करीब 28 करोड़ रुपए) की आर्थिक मदद की थी, ताकि वो जानवरों पर अपनी रिसर्च जारी रख सके।  जानकारी मिली है कि फंडिंग पिछले 10 साल से चल रही थी।
2.    चमगादड़ पर प्रयोग
कोरोना वायरस जब दुनिया में दस्तक दी थी उसके कई दिनों बाद ज्ञात हुआ कि इंसानों में कोरोना का वायरस चमगादड़ से आया है। इसके बाद विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भी इस ओर इशारा किया कि चमगादड़ कोरोना का वाहक है। आरोप जाहिर है कि वुहान की इसी लैब से कोरोनावायरस लीक हुआ और चीन से होता हुआ पूरी दुनिया में फैल गया। इसके बाद अमेरिका ने चीन ने एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगाए।3. चमगादड़-पेंगोलिन थ्योरी
जब कोरोनावायरस का पहला केस वुहान में सामने आया तो इस बात को नजरअंदाज कर दिया गया कि इसका कैरियर कोई जानवर भी हो सकता है। बाद में खुद चीनी वैज्ञानिकों ने शंका जाहिर करते हुए खुलासा किया कि वायरस चमगादड़ से पेंगोलिन में पेंगोलिन से इंसान में फैला है।