मलेशिया के वर्षा वनों में पाए जाने वाले एक दुर्लभ उल्‍लू को 125 साल बाद फिर से देखा गया है। वन्यजीव विशेषज्ञों को कई वर्षों से इसकी तलाश थी। इस उल्लू को आखिरी बार 1892 में देखा गया था। नारंगी रंग की आंखों वाले यह अद्भुत उल्‍लू अब मलेशिया के माउंट किनाबलू के जंगलों में एक पेड़ पर बैठा हुआ दिखाई दिया है। 

वन्यजीवों पर रिसर्च करने वाले विशेषज्ञों का कहना है कि यह उल्लू राजाह स्‍कोप प्रजाति का है और दुर्लभ होने की वजह से इसे संरक्षित करने की जरूरत है। इस उल्‍लू के शरीर पर खास तरह के धारियां बनी हुई हैं और इसका पर्यावास भी अलग तरह का है। इस उल्लू की सबसे पहली पहचान 1892 में रिचर्ड बोवडलर शार्पे ने की थी। स्मिथसोनियन माइग्रेटरी बर्ड सेंटर के रिसर्चर्स बताया कि इस उल्लू के बारे में अभी अधिक जानकारी नहीं है, लेकिन ये घने जंगलों के भीतर रहता है। जलवायु परिवर्तन, जंगलों की अंधाधुंध कटाई और पॉम ऑयल की खेती की वजह से इनके पर्यावस पर संकट मंडराने लगा है। इस उल्लू की तलाश में लंबा वक्त गुजारने वाले तकनीकी मामलों के विशेषज्ञ कीगन ट्रांनक्लिलो ने बताया कि ये एक अंधेरी जगह वाले पेड़ पर बैठा हुआ था।

राजाह स्कोप उल्लू एक छोटे आकार पक्षी है, जिसका वजन 100 ग्राम के करीब होता है। इसकी लंबाई 24 सेंटीमीटर होती है। इस उल्लू के पंख रूखे, छाती पर काली धारियां, अजीब तरह के कान और शरीर के भीतरी किनारे सफेद रंग के होते हैं। इसके अलावा, इसकी आंखें नारंगी रंग की होती है। इसकी पारिस्थितिकी के बारे में अब तक जो भी जानकारी मौजूद थी, वो सुमात्रा उप-प्रजाति से मिली थी।