अंतरिक्ष में रूसी सैटेलाइट और चीन के रॉकेट के बीच भिड़ंत होते-होते बच गई। दावा किया जा रहा है कि यदि ये दोनों टकरा जाते तो इनके क्षतिग्रस्त होने से अंतरिक्ष में भारी मलबा फैल जाता। इस मलबे से अन्य देशों के सैटेलाइट और इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन को खतरा पैदा हो सकता था। 

अंतरिक्ष मलबे को ट्रैक करने वाली कंपनी लियोलैब्स ने हाल ही निष्क्रिय सैटेलाइट और रॉकेट के बीच भिड़ंत की आशंका प्रकट की थी। कंपनी के हवाले से बताया जा रहा है कि रूस की कॉसमॉस 2007 को दक्षिणी पोल की तरफ बढ़ते देखा गया था। जबकि चीन का चेंज झेंग 4सी रॉकेट उत्तर की तरफ जा रहा था। उस समय दोनों ऑब्जेक्ट्स की गति 52918 किलोमीटर प्रति घंटा थी। जिसके बाद से लियोलैब्स ने अपने रडार की मदद से इन दोनों पर नजर रखनी शुरू कर दी।

जानकारी के मुताबिक दोनों ऑब्जेक्ट्स 26 से 141 फीट की दूरी से गुजर गए। जिससे इनके बीच कोई भिड़ंत नहीं हुई। अगर यह भिड़ंत हो जाती तो आसपास घूम रहे दूसरे सैटेलाइट्स के अलावा अन्य स्पेस मिशन को भी भारी नुकसान पहुंचता। इन दोनों ऑब्जेक्ट्स का संयुक्त द्रव्यमान 2.8 मीट्रिक टन से ज्यादा था। वैज्ञानिकों का कहना है कि यदि दोनों भारी ऑब्जेक्ट्स भिड़ जाते तो अंतरिक्ष में मलबे के रूप में हजारों टुकड़े फैल जाते। जिससे अंतरिक्ष में घूम रहे अन्य सैटेलाइट्स के लिए खतरा पैदा होता। इस समय अंतरिक्ष में लगभग 170 मिलियन से ज्यादा ऐसे टुकड़े (कबाड़) घूम रहे हैं। इनके कारण पहले भी गंभीर समस्या पैदा हुई है।