अफगानिस्तान के मौजूदा हालात को लेकर भारत ने एक बार फिर से चिंता जताई है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत के स्थायी प्रतिनिधि टीएस तिरुमूर्ति ने कहा है कि अफगानिस्तान की स्थिति अभी भी नाजुक बनी हुई है और एक पड़ोसी होने के नाते हमें मौजूदा हालातों को लेकर चिंता है।

इस दौरान टीएस तिरुमूर्ति ने अफगानिस्तान पर भारत का रुख विश्व समुदाय के सामने रखा। उन्होंने तालिबान को साफ संदेश दिया कि अफगानिस्तान की जमीन का इस्तेमाल आतंकवाद के लिए नहीं होना चाहिए। तालिबान ने प्रतिबद्धता जताई है कि वह आतंकवाद के लिए अफगान भूमि के उपयोग की अनुमति नहीं देगा, उम्मीद है कि इसका पालन होगा। 

उन्होंने कहा कि अफगान क्षेत्र का इस्तेमाल किसी देश को धमकाने, हमला करने, आतंकवादियों को पनाह देने, प्रशिक्षित करने के लिए या आतंकवादी गतिविधि की योजना बनाने और अपनी आय बढ़ाने के लिए नहीं किया जाना चाहिए। इस दौरान तिरुमूर्ति ने काबुल एयरपोर्ट पर हुए हमले की भी निंदा की। उन्होंने कहा कि काबुल में आतंकी हमला ने अफगानिस्तान के लिए गंभीर खतरा पैदा कर दिया है। इसलिए जरूरी है कि आतंकवाद रोकने को लेकर जो संकल्प जताया गया है उसका सम्मान किया जाए।

वहीं संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुतारेस ने तालिबान से बातचीत की पैरवी की है। गुतारेस ने कहा है कि हमें तालिबान से बात करनी होगी ताकि लाखों मौतों को टाला जा सके। गौरतलब है कि अफगानिस्तान में सरकार गठन के बाद से ही तालिबान पर तमाम देशों की नजरें हैं। तालिबानी ने अपने मंत्रिमंडल में कई ऐसे नेताओं को भी मंत्री बनाया गया जिन्हें आतंकी घोषित किया जा चुका है। वहीं मंत्रिमंडल में महिलाओं को भी भागीदारी नहीं दी गई है। तालिबान ने अफगानिस्तान में 33 कैबिनेट मंत्रियों वाली अंतरिम सरकार की घोषणा की थी। इनमें प्रधानमंत्री मुल्ला हसन अखुंद सहित 14 से अधिक मंत्री संयुक्त राष्ट्र व अमेरिका द्वारा घोषित आतंकी सूची में हैं। करोड़ों के इनामी आतंकी सिराजुद्दीन हक्कानी को गृहमंत्री बनाया गया है।