कोरोना संक्रमण के खिलाफ हथियार बताई जा रहे टीके के वैक्सीनेशन में लगातार धांधली की बात सामने आ रही है। जानकारी के अनुसार 28 जुलाई को जिला मुख्यालय से 50 किलोमीटर दूर पिपरिया ग्राम पंचायत में वैक्सीनेशन होना था। गांव वाले सुबह से दोपहर तक स्कूल में डोज लगने का इंतजार करते रहे। इस बीच गांव वाले अधिकारियों को फोन भी करते रहे लेकिन किसी ने फोन नहीं उठाया। 

इसकी जानकारी के बाद सरपंच ने शाम को एसडीएम से बात की तो जवाब मिला कि चार्ट बता रहा है कि तुम्हारे गांव में 158 लोगों को वैक्सीन लग चुकी है, तुम ही नहीं रहे होगे। वहीं, ग्रामीणों ने एएनएम को कॉल किया तो पता चला कि उनके हिस्से की 158 डोज 18 किलोमीटर दूर जिलेटिन फैक्ट्री के कर्मियों को लगा दी गई है। ग्रामीणों ने सीएम हेल्पलाइन में मामले की शिकायत दर्ज कराई है। 

कनवास के ग्रामीणों ने बताया कि सरपंच को 27 जुलाई की रात ही वैक्सीनेशन के बारे में सूचना आ गई थी। ग्राम कोटवार दुर्गेश प्रधान ने डुगडुगी पीट कर ग्रामीणों को वैक्सीनेशन की जानकारी भी रात में दे दी। 

गांव के माध्यमिक शाला में वैक्सीनेशन की तैयारी की गई थी। सुबह स्कूल के शिक्षक अशोक सिंह ठाकुर और महिला शिक्षक रानी उपाध्याय भी पहुंच गईं। यहां कनवास सहित ग्राम पंचायत के टिकरी, रईयाखेड़ा व खपरा गांव के लोगों को भी वैक्सीन लगना था. गांव के लिए कुल 300 डोज आवंटित हुए थे। इसमें 100 डोज सेकेंड डोज के लगने थे. वहीं 200 फर्स्ट डोज लगने थे। 

ग्रामीणों ने इस मामले की शिकायत सीएम हेल्पलाइन पर की। वहां से बताया गया कि आपकी कॉल रिकॉर्ड की जा रही है। झूठ बोलने पर आप के खिलाफ भी एफआईआर दर्ज हो जाएगी। उनकी कॉल जबलपुर में भी ट्रांसफर कर बात कराई गई। ग्रामीणों ने स्थानीय विधायक संजय यादव से भी मामले की शिकायत की। 

ग्रामीणों की शिकायत के बाद गांव में 31 जुलाई को वैक्सीनेशन का कैंप लगाया गया है। पर इस बार सिर्फ 100 लोगों को सेकेंड डोज की वैक्सीन लगाई जा रही है। पहले डोज वालों को अभी इंतजार करना पड़ेगा। SDM अनुराग तिवारी ने कहा कि ग्रामीणों की शिकायत की जांच जारी रहेगी। प्रकरण में BMO और CVMO से जवाब मांगा गया है। जिला टीकाकरण अधिकारी शत्रुघन दाहिया ने भी प्रकरण में दोनों अधिकारियाें से सेंटर बदलने के बारे में जवाब मांगा है।