नैनीताल. उत्तराखंड में बारिश (Uttarakhand rain) के चलते मौतों के आंकड़े में इज़ाफा दर्ज किया गया।  सरकारी आंकड़े के अनुसार आपदाओं और दुर्घटनाओं में मरने वालों (Death toll in disasters and accidents reached 52)  की संख्या 52 पहुंच गई, जिसमें से नैनीताल में 28 मौतें दर्ज हुईं और करीब आधा दर्जन लोग अब भी लापता हैं।  इधर, गृह मंत्री अमित शाह बुधवार रात उत्तराखंड पहुंचे और आज गुरुवार को वह आपदाग्रस्त इलाकों का हवाई सर्वेक्षण करने जाएंगे।  वहीं धीरे धीरे हालात उत्तराखंड में सुधरते हुए बताए जा रहे हैं और अल्मोड़ा जैसे पहाड़ी इलाकों में फंसे हज़ारों पर्यटकों का राज्य से लौटना किसी तरह शुरू हो सका है। 

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह (Union Home Minister Amit ) देहरादून एयरपोर्ट पर बुधवार रात पहुंचे, जहां मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी (Chief Minister Pushkar Singh Dhami)  समेत अन्य नेताओं ने उनकी अगवानी की।

 उत्तराखंड में आपदा का जायज़ा लेने के लिए पहुंचे अमित शाह ने नेताओं व अधिकारियों के साथ उच्च स्तरीय बैठक भी की और गुरुवार को वह खास तौर से कुमाऊं के सर्वाधिक प्रभावित इलाकों का हवाई सर्वे करने जाएंगे।  इधर, सबसे ज़्यादा नुकसान नैनीताल (Nainital) ज़िले में होना बताया जा रहा है। 

राज्य के साथ नैनीताल को जोड़ने वाली तीन में से दो प्रमुख सड़कें कालाढूंगी-नैनीताल और भीमताल होते (Nainital-Haldwani road ) हुए भवाली और काठगोदाम वाली सड़क फिर से शुरू होने की खबरें हैं।  नैनीताल-हल्द्वानी रोड सबसे ज़्यादा इस्तेमाल होती है, लेकिन यह अब भी बंद है और उम्मीद जताई जा रही है कि यह भी जल्द शुरू हो सकती है।  भारी बारिश के दौर से पहले रोज़ाना नैनीताल में करीब 15,000 पर्यटक आ रहे थे लेकिन अब नए पर्यटकों की संख्या शून्य है। 

बादल फटने की घटना से प्रभावित रामगढ़ इलाके के दौरे पर मुख्यमंत्री धामी पहुंचे।  उनके साथ केंद्रीय मंत्री अजय भट्ट भी मौजूद थे। यहां पीड़ितों से मुलाकात के बाद धामी ने कहा कि सबसे बड़ी प्राथमिकता बंद रास्तों को खुलवाना ही है , सूत्रों के मुताबिक आपदा में मारे गए लोगों के पोस्टमार्टम करवाए जाने की बात भी धामी ने कही।