भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के मद्देनजर मतगणना से पहले समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव के खिलाफ जनता को उकसाने और झूठ फैलाने का आरोप लगाते हुए चुनाव आयोग से कार्रवाई की मांग की है। भाजपा के वरिष्ठ नेताओं के एक प्रतिनिधिमंडल ने यहां आयोग से मुलाकात कर एक ज्ञापन सौंपा जिसमें आयोग से मतगणना केंद्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करने का अनुरोध किया गया। 

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भाजपा के इस प्रतिनिधिमंडल में केंद्रीय मंत्री और उत्तर प्रदेश चुनाव प्रभारी धर्मेंद्र प्रधान, केंद्रीय मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी, जी. किशन रेड्डी और पार्टी नेता ओम पाठक शामिल थे। चुनाव आयोग से मुलाकात के बाद प्रधान ने संवाददाताओं से कहा, विधानसभा चुनाव में हार के भय से यादव हताश हो गए हैं और बौखला गए हैं। एक संवैधानिक पद पर रहने के बावजूद यादव ने जिस भाषा का सार्वजनिक रूप से प्रयोग किया और संवैधानिक व्यवस्थाओं पर सवाल उठाए, यह मानसिकता बहुत खतरनाक है। उन्होंने कहा कि चुनाव में हार भी स्वीकार करनी चाहिए, लेकिन आपत्तिजनक भाषा का प्रयोग करके चुनाव आयोग की विश्वसनीयता पर सवाल उठाकर यादव ने मतदाताओं के साथ-साथ लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं का भी अपमान किया है। उन्होंने कहा, हमने चुनाव आयोग से मांग की है कि हार से भयभीत होकर जो जनता को उकसाने का काम कर रहे हैं उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए। आयोग को सौंपे ज्ञापन में भाजपा ने कहा है कि आठ तारीख को यादव ने असंतोष फैलाने का प्रयास किया और चुनाव आयोग और उसके अधिकारियों के खिलाफ निराधार, तुच्छ और झूठे आरोप लगाए। 

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इसमें आगे कहा है राजनीतिक दलों या असामाजिक तत्वों को लोकतांत्रिक या चुनावी प्रक्रियाओं को पटरी से उतारने की अनुमति नहीं दी जा सकती। सम्मानित और संवैधानिक आयोग को चुनावों के अधीक्षण, निर्देशन और नियंत्रण की जिम्मेदारी सौंपी जाती है, इसलिए आयोग को पूर्ण रूप से अपने अधिकार का दावा करना चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि मतगणना स्थलों और मतगणना प्रक्रिया की सुरक्षा के लिए कड़े कदम उठाए जाएंगे। भाजपा ने कड़े और निवारक उपायों की मांग करते हुए अनुरोध किया कि ऐसे राजनीतिक दलों के गैर-जिम्मेदार नेताओं, जो इन असामाजिक तत्वों को अशांति पैदा करने के लिए उकसा रहे हैं और भड़का रहे हैं, उनसे चुनावी कानूनों और अन्य उपलब्ध कानूनी उपायों के अनुसार प्रभावी ढंग से निपटा जाना चाहिए।